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ट्रम्प का दवाओं पर 100% आयात शुल्क का ऐलान, वैश्विक फार्मा जगत में खलबली

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03 अप्रै. 2026, 04:55 AM 4 मिनट में पढ़ें 2

डोनाल्ड ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप

वाशिंगटन । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल के आक्रामक आर्थिक एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए गुरुवार, 2 अप्रैल 2026 को एक नए कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जो विदेशी दवाओं पर 100% तक भारी-भरकम टैरिफ लगाने का मार्ग प्रशस्त करता है. यह आदेश उन फार्मास्युटिकल कंपनियों को निशाना बनाता है जो अमेरिकी प्रशासन के साथ मूल्य निर्धारण समझौतों पर नहीं पहुंच पाई हैं. 


राष्ट्रपति का यह कदम 'लिबरेशन डे' की पहली वर्षगांठ पर आया है, जिसने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और शेयर बाजारों में एक बार फिर अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है. नए नियमों के मुताबिक, जो कंपनियां 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' प्राइसिंग डील पर हस्ताक्षर करेंगी और अमेरिका में दवाओं तथा उनके कच्चे माल (API) के उत्पादन के लिए प्लांट लगाएंगी, उन्हें 0% टैरिफ की छूट मिलेगी. 

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इसके विपरीत, जो कंपनियां अमेरिका में विनिर्माण इकाइयां तो लगा रही हैं लेकिन मूल्य निर्धारण समझौते के लिए तैयार नहीं हैं, उन पर तत्काल 20% टैरिफ लगाया जाएगा, जिसे अगले चार वर्षों में बढ़ाकर 100% कर दिया जाएगा.


प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि कंपनियों को बातचीत के लिए अभी कुछ महीनों का समय दिया गया है. बड़ी कंपनियों के पास समझौते के लिए 120 दिन और अन्य के पास 180 दिन का समय है. 


हालांकि अभी तक प्रभावित होने वाली विशिष्ट दवाओं या कंपनियों के नामों की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन यह स्पष्ट है कि फाइजर, एली लिली और ब्रिस्टल मायर्स स्क्विब जैसी दिग्गज कंपनियों ने पहले ही संभावित टैरिफ के दबाव में प्रशासन के साथ मूल्य कटौती के सौदे किए हैं. कुल 17 समझौतों में से 13 पर अब तक हस्ताक्षर हो चुके हैं. 


राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने आदेश में तर्क दिया है कि दवाओं और उनके अवयवों के आयात पर निर्भरता 'राष्ट्रीय सुरक्षा' के लिए खतरा है और घरेलू उत्पादन बढ़ाना अनिवार्य है. यह कदम ऐसे समय में आया है जब हाल ही में फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के कुछ पिछले टैरिफ फैसलों को पलट दिया था, जिसके बाद उन्होंने व्यापार विस्तार अधिनियम 1962 की धारा 232 का उपयोग करते हुए यह नया मोर्चा खोला है.


इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए फार्मास्युटिकल रिसर्च एंड मैन्युफैक्चरर्स ऑफ अमेरिका (PhRMA) के सीईओ स्टीफन जे. उबल ने गंभीर चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक दवाओं पर इस तरह के कर लगाने से न केवल स्वास्थ्य देखभाल की लागत बढ़ेगी, बल्कि अमेरिका में होने वाले अरबों डॉलर के निवेश पर भी संकट मंडराएगा. 


उन्होंने याद दिलाया कि अमेरिका में आयात होने वाली अधिकांश दवाएं उसके भरोसेमंद सहयोगियों से आती हैं, ऐसे में इसे सुरक्षा खतरा बताना तर्कसंगत नहीं है. 


इस बीच, भारत जैसे प्रमुख जेनेरिक दवा निर्यातक देशों के लिए भी यह 'टैरिफ शॉक' चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि अमेरिका भारतीय फार्मा क्षेत्र के लिए एक बड़ा बाजार रहा है. हालांकि, अमेरिका ने यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्जरलैंड जैसे कुछ देशों के साथ विशेष व्यापार ढांचे के तहत टैरिफ को 15% पर सीमित करने का समझौता किया है, जबकि ब्रिटेन को भविष्य में 0% की उम्मीद के साथ फिलहाल 10% के दायरे में रखा गया है.


दवाओं के अलावा, ट्रम्प ने स्टील, एल्युमीनियम और कॉपर पर लगने वाले 50% टैरिफ के गणना के तरीकों में भी बदलाव किया है, जो सोमवार, 6 अप्रैल से लागू होंगे. अब टैरिफ की गणना 'फुल कस्टम्स वैल्यू' यानी ग्राहकों द्वारा भुगतान की जाने वाली वास्तविक कीमत पर की जाएगी, ताकि विदेशी निर्यातक कम भुगतान करके बच न सकें. 


वॉशिंग मशीन जैसे उत्पाद, जिनमें 15% से अधिक धातु का उपयोग होता है, अब पूरे मूल्य पर 25% टैरिफ के दायरे में आएंगे. 


राष्ट्रपति का दावा है कि ये कदम अमेरिका से 'चुराई गई संपत्ति' को वापस लाने और व्यापार घाटे को कम करने के लिए जरूरी हैं.


हालांकि, जानकारों का मानना है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में इस तरह की उथल-पुथल से बढ़ती महंगाई के बीच आम परिवारों और व्यवसायों पर आर्थिक बोझ और बढ़ेगा. अदालती चुनौतियों और राज्यों के विरोध के बावजूद, ट्रम्प प्रशासन अपने 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडे के तहत आयातित वस्तुओं पर आक्रामक रुख जारी रखने के संकेत दे रहा है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP