वेनेजुएला पर ट्रम्प का दबाव: चीन-रूस-ईरान-क्यूबा से दूर रहें
वाशिंगटन । डेस्क: अमेरिका वेनेजुएला पर अपना प्रभाव बढ़ाने की दिशा में तेजी से कदम उठा रहा है. डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन को वेनेजुएला की चीन, रूस, क्यूबा और ईरान के साथ बढ़ती नज़दीकी बिल्कुल रास नहीं आ रही है. अमेरिकी सूत्रों के अनुसार, वॉशिंगटन चाहता है कि वेनेजुएला इन चारों देशों से अपने राजनीतिक, सैन्य और आर्थिक संबंध तोड़े. इस संबंध में वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेलसी रोड्रिगेज़ को ट्रम्प प्रशासन की ओर से साफ संदेश दे दिया गया है.
रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रोड्रिगेज़ से बातचीत के दौरान यह मांग रखी कि चीन, रूस, क्यूबा और ईरान के सभी खुफिया एजेंटों और सैन्य अधिकारियों को वेनेजुएला से बाहर निकाला जाए.
इन देशों के केवल सीमित संख्या में राजनयिकों को ही वहां रहने की अनुमति देने की बात कही गई है. इस मुद्दे पर रुबियो ने हाल ही में अमेरिकी कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के साथ बंद कमरे में बैठक भी की.
‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के अनुसार, अमेरिका को संदेह है कि इन चार देशों के जासूस वेनेजुएला की धरती पर सक्रिय हैं. वहीं ‘एबीसी न्यूज़’ ने दावा किया है कि अमेरिका वेनेजुएला पर केवल राजनीतिक ही नहीं, बल्कि आर्थिक दबाव भी बना रहा है, ताकि इन देशों के साथ उसके सभी व्यावसायिक रिश्ते खत्म हों.
तेल के मुद्दे पर भी अमेरिका ने सख्त रुख अपनाया है. वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल भंडार है, जिसकी अनुमानित मात्रा करीब 300 अरब बैरल बताई जाती है. अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि वेनेजुएला अमेरिका के साथ दोबारा तेल व्यापार शुरू करे और अमेरिकी कंपनियों को वहां प्रवेश दे.
इसके लिए वेनेजुएला को अपने तेल क्षेत्र के राष्ट्रीयकरण की नीति में बदलाव या ढील देनी पड़ सकती है.
डोनाल्ड ट्रम्प ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर दावा किया है कि वेनेजुएला अमेरिका को 3 से 5 करोड़ बैरल ‘उच्च गुणवत्ता वाला’ तेल देगा, जिसे बाजार मूल्य पर बेचा जाएगा. ट्रम्प का कहना है कि इस बिक्री से होने वाली आय का नियंत्रण उनके हाथ में रहेगा.
इन घटनाक्रमों के बाद कई विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी प्रशासन का असली लक्ष्य वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर नियंत्रण हासिल करना है.
इसी क्रम में हाल ही में काराकास में अमेरिकी सेना ने सैन्य कार्रवाई की, जिसमें राष्ट्रपति निकोलास मादुरो को उनकी पत्नी समेत हिरासत में लेकर अमेरिका ले जाया गया. इसके तुरंत बाद रुबियो और रोड्रिगेज़ के बीच कई दौर की बातचीत हुई.
हालांकि अमेरिका लगातार इस बात से इनकार करता रहा है कि वह वेनेजुएला पर कब्जा या उसके संसाधनों पर नियंत्रण चाहता है, लेकिन हालिया घटनाएं और शर्तें वॉशिंगटन की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं.
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