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नार्को-आतंकवाद के नाम पर ट्रंप के झूठ का पर्दाफाश

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05 जन. 2026, 01:12 AM 4 मिनट में पढ़ें 1

ट्रंप का झूठ
ट्रंप का झूठ

वाशिंगटन । डेस्क: वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने “नार्को-आतंकवाद के खिलाफ बड़ी जीत” के रूप में पेश करने की कोशिश की, लेकिन कुछ ही घंटों में उनका यह दावा खुद उनके बयानों से ही ढह गया. जिस कार्रवाई को ड्रग्स के खिलाफ युद्ध बताया गया, वह दरअसल वेनेजुएला के तेल पर कब्जे की खुली रणनीति बनकर सामने आ गई है. ट्रंप के शब्दों और अमेरिकी कदमों ने साफ कर दिया कि “नार्को-आतंकवाद” सिर्फ एक बहाना था, असली निशाना दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है.


शनिवार को कराकास पर अमेरिकी हमलों और मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि यह कार्रवाई मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए की गई है. मादुरो पर न्यूयॉर्क की अदालत में ड्रग्स तस्करी और साजिश जैसे आरोपों का हवाला दिया गया. 

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लेकिन इसी कार्रवाई में दर्जनों वेनेजुएलाई नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई. इसके तुरंत बाद ट्रंप ने जिस तरह से वेनेजुएला के तेल और अमेरिकी नियंत्रण की बातें कीं, उससे पूरी कहानी पलट गई.


फ्लोरिडा स्थित अपने निवास मार-ए-लागो में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका फिलहाल वेनेजुएला को “चलाएगा”, वहां के तेल ढांचे को दोबारा खड़ा करेगा और जमीन के नीचे मौजूद “बेहद बड़ी संपदा” को निकालकर वैश्विक बाजार में बेचेगा. 


उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका चीन और रूस जैसे देशों को भी वेनेजुएला का तेल बेचेगा. सवाल यह है कि अगर यह अभियान ड्रग्स के खिलाफ था, तो कुछ ही घंटों में तेल और मुनाफे की भाषा क्यों सामने आ गई?


मादुरो लंबे समय से इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं. उनका कहना रहा है कि अमेरिका मादक पदार्थों की तस्करी का आरोप लगाकर वेनेजुएला के प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा करना चाहता है. ट्रंप प्रशासन की ताजा बयानबाजी ने मादुरो के इस आरोप को और मजबूती दी है.


मादुरो की गिरफ्तारी के बावजूद वेनेजुएला में सत्ता का ढांचा तुरंत नहीं बदला. सुप्रीम कोर्ट ने उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को कार्यवाहक राष्ट्रपति नियुक्त किया है, ताकि प्रशासनिक कामकाज जारी रहे. डेल्सी रोड्रिगेज पहले से ही वित्त मंत्री और तेल मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. यानी देश की अर्थव्यवस्था और तेल क्षेत्र दोनों की चाबी उन्हीं के हाथ में है.


ट्रंप ने यहां भी दोहरे मानदंड दिखाए. एक तरफ वे “लोकतंत्र” की दुहाई देते रहे, दूसरी तरफ उन्होंने निर्वासित विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को समर्थन देने से इनकार कर दिया. ट्रंप का कहना था कि उन्हें जनता का सम्मान हासिल नहीं है. असल में अमेरिका को किसी लोकतांत्रिक नेता की नहीं, बल्कि ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो उसकी शर्तों पर तेल सौदे करने को तैयार हो.


अमेरिका की नजर वेनेजुएला के उस तेल पर है, जिसे ट्रंप बार-बार “हमारा तेल” बताते रहे हैं. उन्होंने खुले तौर पर कहा कि 1970 से 2000 के बीच वेनेजुएला ने अपने तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण कर अमेरिकी कंपनियों से उनके अधिकार छीन लिए थे. 


ट्रंप के मुताबिक, “उन्होंने हमारा तेल ले लिया और अब हम उसे वापस चाहते हैं.” यह बयान किसी राष्ट्राध्यक्ष का नहीं, बल्कि एक कारोबारी सौदेबाज का लगता है.


ट्रंप ने यहां तक कहा कि वेनेजुएला के तेल से ही अमेरिका इस सैन्य कार्रवाई की लागत और अमेरिका को हुए कथित नुकसान की भरपाई करेगा. यानी हमला भी, गिरफ्तारी भी और भुगतान भी सब कुछ तेल से.


वास्तविकता यह है कि अमेरिका ने पिछले कई वर्षों से वेनेजुएला के तेल क्षेत्र को जानबूझकर कमजोर किया है. 2017 के बाद से तेल पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए, सरकारी तेल कंपनी पीडीवीएसए को ब्लैकलिस्ट किया गया और तेल उत्पादन के लिए जरूरी सामग्री की आपूर्ति रोकी गई. अमेरिकी नौसेना ने वेनेजुएला के आसपास तेल टैंकरों को रोकना शुरू किया, जिससे निर्यात बुरी तरह गिर गया.


परिणाम यह हुआ कि दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार होने के बावजूद वेनेजुएला का उत्पादन घटकर 5 से 10 लाख बैरल प्रतिदिन के बीच सिमट गया. यह गिरावट अब अमेरिका के लिए ही एक तर्क बन गई है पहले प्रतिबंध लगाकर उत्पादन गिराओ, फिर कहो कि देश अपने संसाधन संभाल नहीं सकता.


विशेषज्ञों का कहना है कि अगर प्रतिबंध हटें और निवेश आए, तो वेनेजुएला तीन से पांच साल में फिर से 25 लाख बैरल प्रतिदिन तक उत्पादन कर सकता है. लेकिन अमेरिका का उद्देश्य वेनेजुएला को आत्मनिर्भर बनाना नहीं, बल्कि उसे अपने नियंत्रण में रखना है.


इस पूरे घटनाक्रम का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ेगा. अगर भविष्य में अमेरिका के इशारे पर वेनेजुएला उत्पादन बढ़ाता है, तो ओपेक के भीतर संतुलन बिगड़ सकता है. सऊदी अरब और ईरान जैसे देशों पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा.


कुल मिलाकर, मादुरो की गिरफ्तारी ने “नार्को-आतंकवाद” के नाम पर गढ़े गए ट्रंप के झूठ को उजागर कर दिया है. यह कार्रवाई ड्रग्स के खिलाफ नहीं, बल्कि तेल के लिए लड़ी जा रही एक नई साम्राज्यवादी लड़ाई का हिस्सा है, जिसकी कीमत वेनेजुएला की जनता और वैश्विक स्थिरता दोनों को चुकानी पड़ सकती है. (AI Generated Symbolic Photo)

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP