धमतरी में जान हथेली पर रखकर धान की ढुलाई
धमतरी । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिला मुख्यालय से 55 किलोमीटर दूर कोलियारी गांव में धान की कटाई सिर्फ एक मौसमी काम नहीं, बल्कि गहरे पानी और लगातार डर से भरी एक खतरनाक यात्रा है. यह गांव गंगरेल बांध के डूब क्षेत्र में आता है, जिससे गांव के अधिकांश खेत हर साल जलमग्न हो जाते हैं.
कोलियारी के धान किसान अपने दलदली खेतों तक नाव से पहुंचते हैं और फसल कटाई के बाद भी उसे नाव के सहारे ही घर तक लाते हैं. जहां एक ओर यह पानी उनकी धान की फसलों के लिए जीवनदायिनी है, वहीं दूसरी ओर यही उनके जीवन का सबसे बड़ा खतरा बन गया है.
नावों पर लदी अपनी फसल के साथ किसान अक्सर डूबने के खतरे का सामना करते हैं. इसके अलावा, बाढ़ प्रभावित वन क्षेत्रों में जंगली जानवरों से मुठभेड़ का डर भी बना रहता है. किसान श्रीराम ने कहा, "हम अपनी जान जोखिम में डालकर अपनी कटी हुई फसल को घर लाते हैं, ताकि अपने बच्चों को खिला सकें."
एक अन्य किसान देवप्रसाद के अनुसार, "जब हम फसल लाने घर से निकलते हैं, तो पूरे परिवार को चिंता सताती है. जब हम सुरक्षित लौटते हैं, तब परिवार में जान आती है."
कोलियारी गांव में लगभग 60 परिवार रहते हैं, और पूरा गांव लगभग पूरी तरह से धान की खेती पर निर्भर है. गांव के किसान सालों से इस क्षेत्र में एक पुलिया बनाने की मांग कर रहे हैं ताकि उनकी यह मुश्किल खत्म हो सके, लेकिन अभी तक इस पर कोई काम नहीं हुआ है.
एक किसान, श्रीराम कुंजाम ने बताया कि उनके पिता भी इसी तरह नाव से फसल लाते थे, और अब उन्हें भी वही करना पड़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर यही स्थिति रही तो उनके बेटे भी खेती में अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर होंगे.
जिला कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने इसे बाढ़ प्रभावित गांव बताते हुए कहा कि किसानों को सिंचाई के लिए पट्टे दिए गए हैं, लेकिन सड़क संपर्क एक चुनौती है. वन क्षेत्र से होकर सड़क बनाना कठिन है. हालांकि, कलेक्टर ने आश्वासन दिया है कि वह इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान खोजने का प्रयास करेंगे.
फिलहाल, समाधान दूर की कौड़ी है, और कोलियारी के किसान अनिश्चितता और डर के बीच, केवल अपने परिवार का पेट भरने के लिए अपनी खतरनाक नाव यात्रा जारी रखने को मजबूर हैं.
(Symbolic Photo)