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ख़राब हाईवे पर टोल वसूली नहीं-सुप्रीम कोर्ट

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20 अग. 2025, 09:56 AM 3 मिनट में पढ़ें 2

टोल टैक्स
टोल टैक्स

नई दिल्ली | डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें कहा गया था कि अगर हाईवे की हालत बेहद ख़राब है तो नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (NHAI) यात्रियों से जबरन टोल नहीं वसूल सकती.


मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने एनएचएआई की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें केरल हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी. हाईकोर्ट ने त्रिशूर ज़िले के पलियेक्कारा टोल प्लाज़ा (NH-544) पर टोल वसूली रोकने का आदेश दिया था, क्योंकि सड़क की हालत बेहद खराब थी.

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गौरतलब है कि 6 अगस्त को केरल हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि एडप्पली-मन्नूथी खंड पर ख़राब रखरखाव और अधूरे कामों के कारण भारी ट्रैफ़िक जाम हो रहा है, इसलिए वहाँ चार हफ्तों तक टोल वसूली पर रोक लगाई जाए. अदालत ने कहा था कि जब तक जनता को सुगम और सुरक्षित सड़क नहीं मिलती, तब तक टोल वसूलना सार्वजनिक विश्वास का उल्लंघन है.


अब सुप्रीम पीठ ने साफ कहा कि जब कोई नागरिक टोल चुकाता है तो उसके बदले उसे अच्छी सड़क मिलने का अधिकार भी है. अगर यह अधिकार सुरक्षित नहीं है, तो एनएचएआई या उसके एजेंट टोल वसूली का दावा नहीं कर सकते.


पीठ ने कहा- “सार्वजनिक से टोल वसूली की वैधानिक बाध्यता इस भरोसे पर आधारित है कि उन्हें बिना रुकावट और सुरक्षित सड़क मिलेगी. अगर एनएचएआई या उसका एजेंट यह सुविधा देने में असफल रहता है तो यह जनता की वैध अपेक्षाओं के साथ धोखा है और टोल व्यवस्था की बुनियाद को ही हिला देता है.”


सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि नागरिक पहले ही मोटर व्हीकल टैक्स चुका चुके हैं, उसके बाद उनसे फिर टोल वसूली लोकतांत्रिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न है. अदालत ने टिप्पणी की कि सड़कें अक्सर लापरवाही या प्राकृतिक कारणों से ख़राब हो जाती हैं, टोल वसूलने वाले बूथों पर स्टाफ का व्यवहार भी मनमाना होता है, और नागरिकों को घंटों ट्रैफ़िक जाम में खड़ा रहना पड़ता है. ऐसे में टोल “सिर्फ़ जेब पर ही नहीं, धैर्य और पर्यावरण पर भी बोझ है.”


हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जैसे ही सड़क का रखरखाव सुधरता है और यातायात सामान्य होता है, एनएचएआई या ठेकेदार टोल वसूली दोबारा शुरू करने की अनुमति माँग सकते हैं. नुकसान की भरपाई के लिए ठेकेदार एनएचएआई से या फिर संचालन अवधि बढ़ाकर राहत ले सकता है.


सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एनएचएआई को कड़ी फटकार लगाई और पूछा- “अगर किसी सड़क पर एक घंटे की दूरी तय करने में 12 घंटे लगते हैं तो लोग ₹150 टोल क्यों दें?”

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP