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सुप्रीम कोर्ट ने 'ठग लाइफ' के विरोध पर जताई चिंता- आहत होने का कोई अंत नहीं !

सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म ठग लाइफ के विरोध पर जताई चिंता- आहत होने का कोई अंत नहीं !

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20 जून 2025, 02:44 AM 6 मिनट में पढ़ें 4

ठग लाइफ
ठग लाइफ

नई दिल्ली | संवाददाता: फिल्म अभिनेता कमल हासन ने कहा है कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और गुरुवार को आए अदालत के फ़ैसले ने उनके इस भरोसे को और मज़बूत किया है.


गौरतलब है कि हासन की टिप्पणी ' कन्नड़ का जन्म तमिल से हुआ है ', को लेकर हाल ही में काफी तीखी प्रतिक्रिया हुई थी और उनकी फिल्म ठग लाइफ का बहिष्कार करने की मांग की गई थी.

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सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को कर्नाटक सरकार से कहा कि वह यह सुनिश्चित करे कि कमल हासन अभिनीत फिल्म ठग लाइफ की कर्नाटक में रिलीज में कोई बाधा न आए.


मामले की पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने भीड़तंत्र को हावी होने देने के लिए राज्य की आलोचना की थी, जिसके कारण कर्नाटक में फिल्म की रिलीज में देरी हुई.


न्यायालय ने गुरुवार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर इस प्रकार के खतरों से निपटने में राज्य की निष्क्रियता की आलोचना की. राज्य ने न्यायालय को आश्वासन दिया कि वह फिल्म निर्माताओं को सुरक्षा प्रदान करेगा ताकि भीड़ या सतर्कता समूहों के कारण कर्नाटक में फिल्म की रिलीज में बाधा न आए.


न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां और न्यायमूर्ति मनमोहन की खंडपीठ ने आदेश में कहा, " राज्य द्वारा हलफनामे में अपनाए गए रुख को देखते हुए, प्रतिद्वंद्वी दावों में गहराई से जाने की आवश्यकता नहीं है... हलफनामे में यह भी खुलासा किया गया है कि यदि फिल्म रिलीज होती है तो राज्य उसे पूरी सुरक्षा प्रदान करेगा. आज की सुनवाई में, राज कमल फिल्म्स की ओर से पेश हुए श्री सतीश परासरन ने कहा कि वे राज्य सरकार द्वारा अपनाए गए रुख से संतुष्ट हैं. और वे रिट याचिका को आगे नहीं बढ़ाना चाहेंगे. हम राज्य को निर्देश देते हैं कि यदि कोई भी व्यक्ति फिल्म की रिलीज में जबरन बाधा डालने की कोशिश करता है, तो राज्य ऐसे समूहों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करेगा. "


न्यायालय ने यह आदेश बेंगलुरू निवासी एम. महेश रेड्डी द्वारा दायर याचिका पर पारित किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वैध सेंसर प्रमाण पत्र होने के बावजूद, फिल्म ठग लाइफ को कर्नाटक में कट्टरपंथी संगठनों की धमकियों और राज्य प्राधिकारियों की निष्क्रियता के कारण प्रभावी रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया था.


उनके वकील ए वेलन ने शीर्ष अदालत से भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कुछ दिशानिर्देश निर्धारित करने का आग्रह किया. हालाँकि, न्यायालय ने ऐसे कोई भी दिशानिर्देश जारी करने से इनकार कर दिया.


"अब जबकि राज्य ने कर्नाटक में फिल्म की रिलीज का रास्ता साफ करने के लिए हलफनामा दायर कर दिया है, हमें लगता है कि वर्तमान कार्यवाही को बंद कर देना न्याय के हित में होगा. इसलिए हमें नहीं लगता कि यह दिशानिर्देश जारी करने या जुर्माना लगाने का उचित मामला है," पीठ ने कहा.


हालांकि, पीठ ने दोहराया कि राज्य ऐसे मामलों में निगरानी समूहों के दबाव के आगे नहीं झुक सकता.


न्यायालय ने टिप्पणी की, " सिर्फ एक राय के कारण एक फिल्म रोक दी जाती है, एक स्टैंड अप कॉमेडियन को रोक दिया जाता है, एक व्यक्ति को कविता पढ़ने से रोक दिया जाता है... आप (राज्य) उनके दबाव में आ गए. ऐसी परिस्थितियों में राज्य का कर्तव्य है. केवल यह कह देने से कि प्रतिबंध नहीं लगाया गया है, कुछ नहीं होगा. आप इन समूहों के पीछे छिपे हुए हैं. भारत में भावनाओं को ठेस पहुँचाने का कोई अंत नहीं होगा. स्टैंड अप कॉमेडियन कुछ कहता है, हर कोई आहत होता है, फिर तोड़फोड़ होती है. हम कहाँ जा रहे हैं? "


कर्नाटक साहित्य परिषद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय नूली ने कहा कि भाषा एक संवेदनशील विषय है और हासन को इस तरह के गैरजिम्मेदाराना बयान नहीं देने चाहिए. नूली ने कहा, " भाषा एक बहुत ही भावनात्मक मुद्दा है. मैं कट्टरपंथी तत्वों का समर्थन नहीं कर रहा हूं. इससे लाखों लोग आहत हैं. यह केवल प्रचार का हथकंडा है."


इस पर अदालत ने कहा, " फिल्म रिलीज होने से पहले इस तरह का बयान देना सिर्फ एक मार्केटिंग रणनीति है. आप इस जाल में फंस गए... क्या आप प्रतिबंध का समर्थन करते हैं? सिनेमाघरों को जलाने का?"


नूली ने कहा, " ऐसे बयान देने से पहले अभिनेता को अधिक जिम्मेदार होना चाहिए था. फिल्म को अभिनेता की माफी के अधीन प्रदर्शित किया जाना चाहिए. "


न्यायालय ने कहा, " माफी मांगने का कोई सवाल ही नहीं है... आप अपने शोध के आधार पर उनके बयान का सामना करें. उनका प्रतिवाद करें. ऐसी स्थिति पैदा करने के बजाय. आप कह रहे हैं कि यह एक नौटंकी है, आप मानहानि का मुकदमा दायर करें. आप कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकते. आपको यह बयान देना होगा कि आप किसी भी गैरकानूनी तरीके से रिहाई का विरोध नहीं करेंगे. "


अदालत के समक्ष दायर याचिका में कहा गया था कि जब विक्ट्री सिनेमा ने बेंगलुरू में फिल्म प्रदर्शित करने की योजना की घोषणा की, तो कर्नाटक रक्षण वेदिके (केआरवी) के अध्यक्ष टीए नारायण गौड़ा ने कथित तौर पर धमकी दी कि अगर राज्य में हासन की कोई भी फिल्म रिलीज हुई तो वे “सिनेमाघरों में आग लगा देंगे.”


लगभग उसी समय, एक सोशल मीडिया पोस्ट में स्पष्ट रूप से 1991 के तमिल विरोधी दंगों को दोहराने का आह्वान किया गया तथा चेतावनी दी गई कि यदि फिल्म राज्य में रिलीज की गई तो हिंसा होगी. 


अदालत को बताया गया कि ट्वीट और कथित धमकियों पर व्यापक जन आक्रोश के बावजूद कोई मामला दर्ज नहीं किया गया.


शीर्ष अदालत के समक्ष दायर याचिका में आगे आरोप लगाया गया कि जब केआरवी सदस्यों ने 1 जून को विक्ट्री सिनेमा की घेराबंदी करने का प्रयास किया तो धमकियाँ बढ़ गईं. इसके बाद कर्नाटक फिल्म चैंबर ऑफ कॉमर्स (केएफसीसी) ने कथित तौर पर दबाव में आकर फिल्म पर “प्रतिबंध” की घोषणा की.


सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले सप्ताह कर्नाटक सरकार से याचिका पर जवाब मांगा था. शीर्ष अदालत ने कमल हासन के प्रोडक्शन हाउस राज कमल फिल्म्स द्वारा दायर इसी मामले से संबंधित मामला भी कर्नाटक उच्च न्यायालय से अपने पास स्थानांतरित कर लिया.


इससे पहले हाई कोर्ट ने हासन की इस टिप्पणी की आलोचना की थी और उनसे मामले को सुलझाने के लिए माफ़ी मांगने को कहा था. हालांकि, हासन ने ऐसा करने से इनकार करते हुए कहा था कि उन्होंने कन्नड़ के बारे में दुर्भावनापूर्ण इरादे से कुछ नहीं कहा था.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP