सोम, 19 अक्टू. 2026

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नेपाल के 60 प्रतिशत घरों में सीवेज मिला दूषित पानी

नेपाल जाने वाले सावधान, वहां 60 प्रतिशत घरों में सीवेज मिला दूषित पानी

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09 फ़र. 2026, 07:28 PM 2 मिनट में पढ़ें 1

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काठमांडू । डेस्क: नेपाल में सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर एक बेहद डरावनी तस्वीर सामने आई है. 'नेपाल मल्टीपल इंडिकेटर सर्वे (MICS) 2024-25' की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, देश की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी ऐसा पानी पीने को मजबूर है जिसमें सीवेज (मल-मूत्र) की गंदगी मिली हुई है. 


सोमवार को सार्वजनिक की गई इस रिपोर्ट ने सरकार के उन दावों की पोल खोल दी है, जिसमें कहा जाता रहा है कि अधिकांश आबादी तक सुरक्षित पानी पहुंच रहा है. नमूनों की जांच में 'ई. कोलाई' (E. coli) जैसे घातक सूक्ष्मजीवों की पुष्टि हुई है, जो सीधे तौर पर मानव मल के पानी में मिलने का संकेत देते हैं.

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शुक्रराज ट्रॉपिकल एंड इन्फेक्शियस डिजीज हॉस्पिटल के क्लिनिकल रिसर्च यूनिट के प्रमुख डॉ. शेर बहादुर पुन ने इस रिपोर्ट को 'खतरनाक' बताते हुए कहा कि पीने के पानी में घातक सूक्ष्मजीवों की इतनी बड़ी मौजूदगी यह दर्शाती है कि देश का जल प्रबंधन तंत्र पूरी तरह विफल हो चुका है. 


विशेषज्ञों के अनुसार, ई. कोलाई जैसे बैक्टीरिया के कारण हर साल मानसून के दौरान नेपाल में हैजा, टाइफाइड, पेचिश, हेपेटाइटिस ए और ई जैसी बीमारियों का प्रकोप फैलता है. चौंकाने वाली बात यह है कि बाजार में बिकने वाला बोतलबंद पानी, जिसे लोग सुरक्षित मानकर पीते हैं, वह भी पहले की जांचों में दूषित पाया जा चुका है.


सर्वेक्षण के आंकड़े एक अजीब विरोधाभास पेश करते हैं. रिपोर्ट कहती है कि नेपाल की 98.2 प्रतिशत आबादी 'बेहतर' जल स्रोतों का उपयोग कर रही है, लेकिन उन्हीं 'बेहतर' स्रोतों से मिलने वाला 60 प्रतिशत पानी असल में जहरीला है. 


स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सिर्फ पाइप बिछा देना या कुएं बनाना काफी नहीं है, क्योंकि वे स्रोत जमीन के भीतर सीवेज लाइनों से दूषित हो रहे हैं. 


इसके अलावा, रिपोर्ट में शिशु मृत्यु दर को लेकर भी चिंता जताई गई है, जिसके अनुसार प्रति 1,000 जन्मों में से 17 नवजात शिशु एक महीने के भीतर ही दम तोड़ देते हैं. यह विस्तृत अध्ययन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) और यूनिसेफ द्वारा संयुक्त रूप से पूरे देश के 12,960 घरों से डेटा लेकर तैयार किया गया है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP