कई हजार सूर्य को निगल लेगा यह राक्षस
नई दिल्ली । डेस्क: नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) ने ब्रह्मांड के सबसे बड़े ब्लैक होल की खोज कर वैज्ञानिकों को चौंका दिया है. यह विशाल ब्लैक होल ब्रह्मांड के एक छोटे से हिस्से में फैला हुआ है, जिसमें लगभग आठ लाख आकाशगंगायें शामिल हैं. इनमें से कुछ आकाशगंगायें इतनी दूर हैं कि वे ब्रह्मांड के प्रारंभिक काल, यानी लगभग 13 अरब साल पहले की स्थिति को दर्शाती हैं.
जेम्स वेब टेलीस्कोप की इस खोज ने ब्रह्मांड के अज्ञात रहस्यों को उजागर करने की नई संभावनायें खोली हैं. वैज्ञानिक अब इस विशाल 'ब्रह्मांडीय नक्शे' से और अधिक रहस्यों के खुलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं. सवाल यह है कि यह विशाल अंधेरा, जो ब्रह्मांड में छिपा है, कब और कैसे सब कुछ को निगल लेगा? इसका जवाब भविष्य के अवलोकनों पर निर्भर करता है.
255 घंटे की निगरानी से खुला राज
जेम्स वेब टेलीस्कोप ने 'कॉसमॉस फील्ड' नामक एक विशेष अंतरिक्ष क्षेत्र की 255 घंटे तक लगातार निगरानी की. इस क्षेत्र में तारे, गैसीय बादल या अन्य खगोलीय पदार्थ बहुत कम हैं, जिसके कारण यह ब्रह्मांड के गहरे अतीत को देखने के लिए आदर्श है. वैज्ञानिकों ने विभिन्न तरंगदैर्घ्य की रोशनी का उपयोग कर इस क्षेत्र की विस्तृत जानकारी एकत्र की. इस अवलोकन ने ब्रह्मांड के 13.5 अरब साल पुराने इतिहास को उजागर किया है.
इन्फ्रारेड तकनीक ने बदली तस्वीर
चूंकि ब्रह्मांड लगातार फैल रहा है, इसलिए दूरस्थ आकाशगंगाओं से आने वाली रोशनी हमारे पास पहुँचते-पहुँचते खिंचकर इन्फ्रारेड रूप में बदल जाती है. यही कारण है कि जेम्स वेब टेलीस्कोप को अत्यंत संवेदनशील इन्फ्रारेड टेलीस्कोप के रूप में डिज़ाइन किया गया है. इसकी मदद से उन सूक्ष्म और खिंचे हुए संकेतों को पकड़ा जा सका, जो पहले के टेलीस्कोप जैसे हबल से देखना असंभव था. इस खोज ने ब्रह्मांड की संरचना को समझने की हमारी पारंपरिक धारणाओं को चुनौती दी है.
वैज्ञानिकों में उत्साह, नई खोजों की उम्मीद
कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सांता बारबरा के भौतिकी विभाग के प्रोफेसर और कॉसमॉस प्रोजेक्ट की प्रमुख शोधकर्ता कैटलिन केसी ने कहा, "टेलीस्कोप के शुरू होने के बाद से ही हम यह सोच रहे थे कि क्या इसके डेटा हमारे मौजूदा ब्रह्मांडीय मॉडल को तोड़ देंगे." उन्होंने आगे बताया, "सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि जेम्स वेब ने हमें इतनी दूर की आकाशगंगायें दिखाईं, जितनी हमने उम्मीद से 10 गुना अधिक थीं. यहाँ तक कि ऐसे सुपरमैसिव ब्लैक होल भी देखे गये, जो हबल टेलीस्कोप से पूरी तरह अदृश्य थे."
डेटा विश्लेषण में चुनौतियाँ
कॉसमॉस फील्ड से प्राप्त डेटा को तुरंत सार्वजनिक किया गया, लेकिन इसे विश्लेषण करना आसान नहीं था. इस तरह के डेटा को प्रोसेस करने के लिए विशेष तकनीकी कौशल और शक्तिशाली कंप्यूटरों की आवश्यकता होती है. फिर भी, इस डेटा ने ब्रह्मांड के इतिहास को समझने के लिए नये द्वार खोल दिये हैं.