DCGI के पद पर इंजीनियरों की पोस्टिंग का विरोध हो रहा है
नई दिल्ली । डेस्क: ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) के पद के लिए भर्ती नियमों में हालिया बदलावों ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. दिल्ली स्थित 'इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन' ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र लिखकर इन नए नियमों को तुरंत वापस लेने या उनमें संशोधन करने की मांग की है. एसोसिएशन ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा को भेजे गए अपने कड़े विरोध पत्र में कहा है कि २० अप्रैल, २०२६ को अधिसूचित नए नियम देश के दवा नियामक ढांचे की अखंडता और गुणवत्ता के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं.
विवाद की मुख्य जड़ वह अधिसूचना है जिसके तहत अब बायोमेडिकल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल जैसे इंजीनियरिंग विषयों के साथ-साथ सामान्य लाइफ साइंस बैकग्राउंड वाले उम्मीदवारों को भी डीसीजीआई जैसे महत्वपूर्ण पद के लिए पात्र बना दिया गया है. फार्मासिस्टों का कहना है कि यह फैसला 'ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940' की मूल भावना के खिलाफ है.
एसोसिएशन के महासचिव भूपेंद्र कुमार ने स्पष्ट किया कि दवाओं के विनियमन, फार्मास्यूटिक्स और फार्माकोलॉजी के लिए जिस विशेषज्ञ ज्ञान की आवश्यकता होती है, उसे सामान्य इंजीनियरिंग या विज्ञान की डिग्री से नहीं बदला जा सकता.
एसोसिएशन ने दलील दी है कि भारत को 'दुनिया की फार्मेसी' कहा जाता है, लेकिन इस तरह के फैसले से रेगुलेटरी सिस्टम में विशेषज्ञता कम होगी और जनस्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा होगा.
पत्र में चेतावनी दी गई है कि दवाओं की मंजूरी और क्लिनिकल ट्रायल जैसे संवेदनशील मामलों में गैर-विशेषज्ञों द्वारा लिए गए निर्णय घातक हो सकते हैं. संगठन ने सवाल उठाया है कि जब अमेरिका के FDA और यूरोपीय मेडिसिन एजेंसी जैसे वैश्विक संस्थान दवा विशेषज्ञों पर निर्भर रहते हैं, तो भारत इस वैश्विक मानक से पीछे क्यों हट रहा है.
उन्होंने मांग की है कि डीसीजीआई का पद केवल फार्मेसी, फार्मास्युटिकल साइंसेज या क्लीनिकल फार्माकोलॉजी में डिग्री रखने वालों के लिए ही सीमित रखा जाए.