कॉलोनाइजर पर मेहरबान वन विभाग ने नियमों को ताक पर रखा
छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में कॉलोनाइजर पर मेहरबान वन विभाग ने नियमों को ताक पर रखा
जगदलपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ का वनांचल कहे जाने वाले बस्तर में पिछले कुछ महीनों से वन विभाग के अफसर वन अधिनियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं.
सारे नियमों को ताक में रखकर जगदलपुर के एक बड़े प्राइवेट कॉलोनाइजर को फायदा पहुंचाने के लिए रिजर्व फॉरेस्ट एरिया में विलुप्त प्रजाति के पाईन पेड़ों को नष्ट किया जा रहा है.
वन आच्छादित बस्तर में स्टेट हाइवे और नेशनल हाइवे तक के निर्माण के लिए वन विभाग की अनुमति लेनी पड़ती है. क्लीयरेंस नहीं मिलने के चलते ऐसे कई कार्य हैं, जिनका काम शुरु ही नहीं हुआ.
इसके बावजूद जगदलपुर वन विभाग कॉलोनाइजर पर इस कदर मेहरबान हुआ कि उसको फायदा पहुंचाने के लिए ने ना केवल नियमों को ताक पर रखा, बल्कि दुर्लभ पाइन पेड़ों की बलि चढ़ाते हुए खुद ही कॉलोनाइजर को रास्ता बनाकर सौंप दिया.
ताकि कॉलोनी निर्माण के लिए कॉलोनाइजर को आसानी हो सके. जबकि इस संदर्भ में किसी तरह का कोई लिखित आदेश नहीं दिया गया है.
कॉलोनाइजर को फायदा पहुंचाने बनाई सड़क
छत्तीसगढ़ का बस्तर, सघन वन परिक्षेत्र है. यहां निवासरत आदिवासियों के लिए यही जंगल भरण—पोषण का जरिया है.
इसके साथ ही वन्यजीवों के संरक्षण के लिए भी वनों का होना निहायत जरूरी है.
इन सब बातों को धता बताते हुए जगदलपुर वन विभाग के अधिकारी वन अधिनियम के खिलाफ जाकर अपनी जेबें गर्म करने के लिए प्राइवेट कॉलोनाइजर को फायदा पहुंचा रहे हैं.
जिसके लिए बरसों पुराने पाइन पेड़ों की बलि देने तक में परहेज नहीं किया गया है.
जगदलपुर के भीतरी इलाकों में स्टेट हाइवे और नेशनल हाइवे का काम सिर्फ इसलिए शुरु नहीं हो पाया है, क्योंकि वन विभाग की तरफ से क्लीयरेंस नहीं मिला.
इसके विपरीत कॉलोनी निर्माण में एक प्राइवेट बिल्डर्स को आ रही दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने वन अधिनियम को दरकिनार कर रिजर्व फॉरेस्ट एरिया में रास्ते का निर्माण कर दिया.
इसके लिए कई पेड़ों को काटा गया है और पगडंडी को इतना चौड़ा कर दिया गया कि उसमें से अब हाईवा, टिप्पर ,ट्रैक्टर तक आसानी से पार होने लगे हैं.
मामले की जांच की जायेगी
इस मामले पर जब वन परिक्षेत्र अधिकारी देवेन्द्र वर्मा से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने नियमों का हवाला देकर कुछ भी कहने से मना कर दिया.
वहीं जिले के वनमंडलाधिकारी ( डीएफओ) उत्तम गुप्ता का कहना है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि रिजर्व फॉरेस्ट एरिया में कॉलोनाइजर को फायदा पहुंचाने कोई सड़क बनाई गयी गई है.
डीएफओ ने कहा कि इस मामले की जांच की जाएगी.
वन सरंक्षण अधिनियमों की अनदेखी
जानकारी के मुताबिक वन परिक्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित होती है.
वन्य जीव संरक्षण और वन्य अधिनियम के तहत वन परिक्षेत्र में प्रदूषण फैलाना भी कानूनन जुर्म है.
पर जगदलपुर वन विभाग के अधिकारी एक कॉलोनाइजर के लिए इन तमाम बातों को धता बताकर अपनी सरपरस्ती में उसे फायदा पहुंचा रहे हैं.