जेडी वेंस के बगैर शांति वार्ता को तैयार न था तेहरान
नई दिल्ली । डेस्क: इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच होने जा रही ऐतिहासिक शांति वार्ता का पूरा दारोमदार अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के कंधों पर टिक गया है. शनिवार सुबह 11:15 बजे (भारतीय समय) जब वेंस पाकिस्तान की राजधानी पहुंचे, तो यह केवल एक राजनयिक दौरा नहीं, बल्कि ईरान की उस जिद की जीत थी जिसने इस वार्ता के लिए वेंस की मौजूदगी को अनिवार्य शर्त बना दिया था.
सूत्रों के मुताबिक, तेहरान ने दोटूक लहजे में स्पष्ट कर दिया था कि अमेरिका से चाहे कोई भी नेता आए या न आए, लेकिन जेडी वेंस को पाकिस्तान आना ही होगा.
ईरान ने यहाँ तक चेतावनी दी थी कि यदि वेंस इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा नहीं बनते हैं, तो ईरान का कोई भी सदस्य समझौते की मेज पर कदम नहीं रखेगा.
ईरान की इस हठ के पीछे एक गहरा रणनीतिक कारण छिपा है.
अमेरिकी राजनयिकों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान वेंस को डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सर्कल में एकमात्र 'युद्ध विरोधी' नेता के रूप में देखता है जो सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीति को प्राथमिकता देते हैं.
यही वजह है कि ट्रंप ने भी पुरानी कड़वाहटों को किनारे रख वेंस को इस मिशन का नेतृत्व सौंपा है.
हालांकि, वेंस ने इस्लामाबाद पहुंचने से पहले वाशिंगटन से स्पष्ट संदेश दिया कि वे इस बैठक को लेकर आशान्वित तो हैं, लेकिन यदि ईरान ने चतुराई दिखाने की कोशिश की, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.
1979 के बाद पहली बार होने जा रही इस आमने-सामने की मुलाकात में वेंस के सामने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची और स्पीकर मोहम्मद बाकेर कलिबाफ होंगे. वेंस के लिए यह उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी परीक्षा है, जहाँ सफल होने पर वे वैश्विक राजनीति में एक शांतिदूत के रूप में उभर सकते हैं.