राजकीय सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन हुईं पद्म विभूषण तीजन बाई
दुर्ग | संवाददाता: पंडवानी की विश्वविख्यात गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई को रविवार को उनके पैतृक गांव गनियारी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई. सुबह करीब 11 बजे उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, जहां सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से अपनी प्रिय लोक कलाकार को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की.
तिरंगे में लिपटे तीजन बाई के पार्थिव शरीर को गांव से अंतिम यात्रा के रूप में स्थानीय श्मशान घाट तक ले जाया गया. अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण, लोक कलाकार, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और उनके प्रशंसक शामिल हुए.
पूरे सम्मान के साथ उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया.
राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री ने जताया शोक
राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मूर्मू ने तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक जताया है.
उन्होंने X पर लिखा- "उन्होंने अपनी सशक्त आवाज, प्रभावशाली उपस्थिति और अनोखी प्रस्तुति से महाभारत की कथाओं को मंच पर जीवंत किया। अपनी विलक्षण प्रतिभा, समर्पण और वर्षों की साधना से उन्होंने छत्तीसगढ़ की समृद्ध पंडवानी परंपरा को देश-विदेश में पहचान दिलाई। भारतीय सांस्कृतिक विरासत का प्रसार करने में उनका अमूल्य योगदान स्मरणीय रहेगा।"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया. उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि तीजन बाई ने अपनी विलक्षण प्रस्तुति के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक कला को वैश्विक पहचान दिलाई. प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका निधन कला और संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है.
मुख्यमंत्री साय बोले- सांस्कृतिक विरासत की अपूरणीय क्षति
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी तीजन बाई के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने पंडवानी के माध्यम से छत्तीसगढ़ का नाम देश और विदेश में गौरवान्वित किया. उन्होंने X पर लिखा- "उनका निधन न केवल लोककला जगत के लिए, बल्कि समूचे छत्तीसगढ़ तथा समस्त देश की सांस्कृतिक विरासत के लिए एक अपूरणीय क्षति है. अपने अद्वितीय गायन शैली, विलक्षण प्रतिभा और लोक परंपराओं के संरक्षण के माध्यम से उन्होंने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित किया. उनका अतुलनीय योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा."
एक महान कलाकार विदा हो गईं- भूपेश बघेल
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी गनियारी पहुंचकर तीजन बाई के अंतिम संस्कार में शामिल हुए. उन्होंने पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनसे जुड़ी अपनी पुरानी यादें साझा कीं.
भूपेश बघेल ने कहा कि छात्र जीवन में वे साइकिल से पंडवानी सुनने जाया करते थे. उन्होंने कहा कि तीजन बाई की कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं थी, बल्कि वह छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की जीवंत पहचान थी. अपनी अद्भुत प्रस्तुति और असाधारण प्रतिभा के बल पर उन्होंने पंडवानी को गांवों की चौपाल से निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया तथा छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा को विश्वभर में सम्मान दिलाया.
उन्होंने कहा कि एक महान कलाकार आज विदा हो गया.
लोक संस्कृति के एक युग का अवसान
तीजन बाई के निधन के साथ छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत माना जा रहा है.
गनियारी में अंतिम विदाई के दौरान लोगों की आंखें नम थीं और हर ओर अपनी प्रिय लोक गायिका के प्रति सम्मान और भावनाओं का सैलाब दिखाई दे रहा था.
उनके गीत, उनकी विशिष्ट पंडवानी शैली और लोककला के संरक्षण में दिया गया योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा.