ट्रेड सीक्रेट केस में TCS को देना होगा $220 M हर्जाना
नई दिल्ली । डेस्क: भारत की दिग्गज आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने ट्रेड सीक्रेट (व्यापारिक गोपनीयता) से जुड़े एक मामले में कंपनी की अपील को खारिज कर दिया है. इसके बाद अब टीसीएस को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1 FY2027) में 7 करोड़ डॉलर (लगभग 5.8 अरब रुपये) का वन-टाइम एक्सेप्शनल चार्ज देना होगा.
इस फैसले के बाद इस पूरे मामले में कंपनी पर कुल वित्तीय बोझ बढ़कर 22 करोड़ डॉलर हो गया है.
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 15 जून 2026 को दिए अपने फैसले में डीएक्ससी टेक्नोलॉजी (DXC Technology) के पक्ष में 16.8 करोड़ डॉलर के हर्जाने के निचले कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा. टीसीएस ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 'रिट ऑफ सर्टिओरीारी' (समीक्षा याचिका) को खारिज कर दिया है, जिसके तहत कंपनी ने यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स के पुराने फैसले को चुनौती दी थी.
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले में पहले ही 15 करोड़ डॉलर का प्रावधान कर चुकी है. अब बाकी बचे 7 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त राशि को हर्जाने, ब्याज और कानूनी लागत के रूप में वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के खातों में शामिल किया जाएगा.
यह पूरा विवाद साल 2019 का है, जब डीएक्ससी की पूर्ववर्ती कंपनी 'कंप्यूटर साइंसेज कॉरपोरेशन' ने टीसीएस के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था. आरोप था कि टीसीएस ने बीमा कंपनी ट्रांसअमेरिका के करीब 2,200 कर्मचारियों को नौकरी पर रखा और उनके जरिए प्रतिद्वंद्वी लाइफ-इंश्योरेंस प्लेटफॉर्म बनाने के लिए गोपनीय व्यावसायिक जानकारियों (ट्रेड सीक्रेट्स) का गलत इस्तेमाल किया.
साल 2023 में एक जूरी ने टीसीएस पर 21 करोड़ डॉलर का जुर्माना लगाने की सिफारिश की थी, जिसे बाद में अमेरिकी जिला न्यायाधीश ब्रेंटली स्टार ने घटाकर 16.8 करोड़ डॉलर कर दिया था. इसमें 5.6 करोड़ डॉलर प्रतिपूरक (कंपेंसेटरी) और 11.2 करोड़ डॉलर दंडात्मक (पुनिटिव) हर्जाना शामिल था.
इसी फैसले को साल 2025 में अपीलीय अदालत ने भी सही ठहराया था, जिसके खिलाफ टीसीएस सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी. हाल ही में समाप्त हुई चौथी तिमाही में टीसीएस का शुद्ध लाभ 137.18 अरब रुपये (करीब 1.45 अरब डॉलर) रहा है.
ट्रेड सीक्रेट क्या है?
ट्रेड सीक्रेट (व्यापारिक गोपनीयता) किसी भी कंपनी या व्यवसाय की वह गोपनीय और मूल्यवान व्यावसायिक जानकारी होती है, जो उसे बाजार में अपने प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त दिलाती है. सरल शब्दों में कहें तो यह बिजनेस का वह 'सीक्रेट फॉर्मूला' या तरीका है जिसके बल पर कोई कंपनी दूसरों से बेहतर उत्पाद या सेवा दे पाती है.
इसके तहत किसी उत्पाद को बनाने का फॉर्मूला, कोई विशेष तकनीक, सॉफ्टवेयर का सोर्स कोड, ग्राहकों की लिस्ट, बिजनेस स्ट्रेटेजी, या कोई खास मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस आ सकता है. उदाहरण के लिए, कोका-कोला का सिरप बनाने का फॉर्मूला या गूगल का सर्च एल्गोरिदम दुनिया के सबसे प्रसिद्ध ट्रेड सीक्रेट्स में से हैं.
किसी भी जानकारी को कानूनी रूप से ट्रेड सीक्रेट मानने के लिए तीन शर्तें पूरी होना जरूरी हैं. पहली, वह जानकारी आम जनता या उस क्षेत्र के अन्य लोगों के लिए सामान्य रूप से उपलब्ध या आसानी से जानने योग्य न हो. दूसरी, गुप्त होने के कारण ही उस जानकारी का एक व्यावसायिक या आर्थिक मूल्य होना चाहिए. तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि उस जानकारी के मालिक या कंपनी ने उसे गुप्त रखने के लिए उचित और कड़े सुरक्षा उपाय किए हों, जैसे कि कर्मचारियों से नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट (NDA) साइन करवाना या डेटा तक पहुंच को सीमित रखना.
पेटेंट के विपरीत, ट्रेड सीक्रेट को सरकार के पास रजिस्टर नहीं कराना पड़ता और इसकी कोई समय सीमा नहीं होती; जब तक इसे छुपा कर रखा जाए, यह हमेशा के लिए सुरक्षित रह सकता है. यदि कोई कर्मचारी या प्रतिद्वंद्वी कंपनी इसे चोरी करती है या धोखे से हासिल करती है, तो उसे 'ट्रेड सीक्रेट का उल्लंघन' माना जाता है, जिसके लिए भारी जुर्माना देना पड़ता है.
ट्रेड सीक्रेट और पेटेंट के बीच सबसे बड़ा और मुख्य अंतर-
ट्रेड सीक्रेट और पेटेंट के बीच सबसे बड़ा और मुख्य अंतर सरकारी पंजीकरण और गोपनीयता का है. ट्रेड सीक्रेट पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि जानकारी को कितना छुपा कर रखा गया है, जिसके लिए सरकार के पास कोई रजिस्ट्रेशन नहीं कराना पड़ता और जब तक वह बात गुप्त है, वह हमेशा के लिए सुरक्षित रहती है.
इसके विपरीत, पेटेंट हासिल करने के लिए कंपनी को अपनी खोज, तकनीक या फॉर्मूले की पूरी जानकारी सरकार को सौंपनी पड़ती है, जिसे सार्वजनिक कर दिया जाता है. पेटेंट कराने का फायदा यह होता है कि सरकार उस तकनीक पर कंपनी को एक तय समय (आमतौर पर 20 साल) के लिए एकाधिकार दे देती है, जिससे कोई दूसरा व्यक्ति बिना अनुमति उसका इस्तेमाल नहीं कर सकता.
लेकिन जैसे ही पेटेंट की अवधि समाप्त होती है, वह तकनीक आम जनता के लिए मुफ्त हो जाती है और कोई भी उसका उपयोग कर सकता है, जबकि ट्रेड सीक्रेट की सुरक्षा की कोई समय सीमा नहीं होती.
दूसरा बड़ा अंतर कानून के संरक्षण के तरीके में है. अगर कोई कंपनी किसी पेटेंटेड तकनीक की नकल करती है, तो पेटेंट मालिक तुरंत कोर्ट जाकर उस पर रोक लगवा सकता है, भले ही नकल करने वाले ने वह तकनीक खुद अपने दिमाग से ही क्यों न विकसित की हो.
वहीं दूसरी ओर, ट्रेड सीक्रेट के मामले में सुरक्षा तभी तक मिलती है जब तक जानकारी चोरी न हो. अगर कोई प्रतिस्पर्धी कंपनी स्वतंत्र रूप से रिसर्च करके या रिवर्स इंजीनियरिंग (यानी आपके उत्पाद को खोलकर या उसकी जांच करके) वही फॉर्मूला खुद ढूंढ लेती है, तो उसे गैर-कानूनी नहीं माना जाता.
ट्रेड सीक्रेट का कानून आपको केवल तब सुरक्षा देता है जब कोई व्यक्ति या कंपनी आपके सीक्रेट को चोरी से, धोखाधड़ी से, या नौकरी के अनुबंध (NDA) का उल्लंघन करके हासिल करती है, जैसा कि टीसीएस और डीएक्ससी टेक्नोलॉजी के मामले में हुआ.
टीसीएस (TCS) और डीएक्ससी टेक्नोलॉजी (DXC Technology) का यह विवाद-
टीसीएस (TCS) और डीएक्ससी टेक्नोलॉजी (DXC Technology) का यह विवाद साल 2019 में शुरू हुआ था, जब डीएक्ससी की पूर्ववर्ती कंपनी 'कंप्यूटर साइंसेज कॉरपोरेशन' (CSC) ने अमेरिका की डलास फेडरल कोर्ट में टीसीएस के खिलाफ मुकदमा दायर किया था. डीएक्ससी ने आरोप लगाया था कि टीसीएस ने एक दूसरी बीमा कंपनी 'ट्रांसअमेरिका' के करीब 2,200 कर्मचारियों को नौकरी पर रखा था.
इन कर्मचारियों के पास डीएक्ससी के सॉफ्टवेयर और प्रणालियों की अंदरूनी पहुंच थी. आरोप के मुताबिक, टीसीएस ने इन कर्मचारियों के जरिए डीएक्ससी के गोपनीय व्यापारिक तौर-तरीकों और सॉफ्टवेयर के सोर्स कोड (ट्रेड सीक्रेट्स) को चुराया और उसका इस्तेमाल खुद का एक प्रतिद्वंद्वी लाइफ-ऑक्शन या लाइफ-इंश्योरेंस प्लेटफॉर्म बनाने के लिए किया.
यह कानूनी लड़ाई कई सालों तक अलग-अलग अमेरिकी अदालतों में चली. साल 2023 में अमेरिका की एक जूरी ने टीसीएस को जानबूझकर ट्रेड सीक्रेट चुराने का दोषी पाया और 21 करोड़ डॉलर का जुर्माना लगाने की सिफारिश की. इसके बाद, अमेरिकी जिला न्यायाधीश ब्रेंटली स्टार ने इस जुर्माने की राशि को थोड़ा कम करते हुए 16.8 करोड़ डॉलर (लगभग 1,400 करोड़ रुपये) तय कर दिया, जिसमें 5.6 करोड़ डॉलर नुकसान की भरपाई (प्रतिपूरक) के लिए और 11.2 करोड़ डॉलर दंडात्मक (पुनिटिव) हर्जाने के रूप में शामिल थे.
टीसीएस ने इस फैसले को साल 2025 में यूएस फिफ्थ सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स में चुनौती दी, लेकिन वहां भी निचली अदालत का फैसला बरकरार रहा.
आखिरकार, टीसीएस ने इस फैसले के खिलाफ अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका दायर की. टीसीएस की दलील थी कि डीएक्ससी को वास्तविक नुकसान साबित किए बिना इतना बड़ा हर्जाना नहीं मिलना चाहिए और दंडात्मक राशि बहुत ज्यादा है.
हालांकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जून 2026 में टीसीएस की इस याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया और अपीलीय अदालत के फैसले को अंतिम माना. इस फैसले के बाद टीसीएस को अब कुल मिलाकर 22 करोड़ डॉलर (जिसमें हर्जाना, ब्याज और कानूनी लागत शामिल है) का भुगतान करना होगा.
चूंकि कंपनी पहले ही 15 करोड़ डॉलर का प्रावधान कर चुकी थी, इसलिए अब उसे चालू वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 7 करोड़ डॉलर का अतिरिक्त एकमुश्त खर्च उठाना पड़ेगा.