टाटा को पश्चिम बंगाल में वापस लाएंगे सुवेंदु के मंत्री
कोलकाता । डेस्क: पश्चिम बंगाल में नवगठित भाजपा सरकार के मंत्रियों ने बुधवार को विभागों का बंटवारा होने के बाद औपचारिक रूप से अपना कामकाज संभाल लिया है. पदभार ग्रहण करते ही नए मंत्रियों ने राज्य की आर्थिक, औद्योगिक और शैक्षिक स्थिति को सुधारने के लिए अपनी प्राथमिकताओं और कड़े संकल्पों को साझा किया है. राज्य के नए उद्योग मंत्री तापस रॉय, उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय और वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि पिछले १५ वर्षों के तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल की कमियों को दूर करना और प्रशासनिक व्यवस्था को नए सिरे से संवारना उनकी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है.
राज्य के नए उद्योग मंत्री तापस रॉय ने कार्यभार संभालते ही पश्चिम बंगाल में औद्योगिक विकास को गति देने और निवेश आकर्षित करने पर सबसे अधिक जोर दिया. उन्होंने कहा कि टाटा समूह को पश्चिम बंगाल में वापस लाना उनकी सरकार के मुख्य लक्ष्यों में से एक है. तापस रॉय का मानना है कि टाटा की वापसी से राज्य की छवि बदलेगी और अन्य बड़े निवेशक भी यहां आने के लिए प्रेरित होंगे.
उन्होंने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि विगत १५ वर्षों में राज्य में न तो उद्योग का विकास हुआ और न ही कृषि का. सिंगूर आंदोलन के सहारे सत्ता में आने वाली सरकार ने राज्य को औद्योगिक रूप से पीछे धकेल दिया, जिसके कारण ६,६८८ निवेशकों ने बंगाल छोड़ दिया.
उद्योग मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य में एक ही दल की सरकार (डबल इंजन) होने के कारण अब प्रधानमंत्री और गृहमंत्री बंगाल के विकास को लेकर बेहद गंभीर हैं, जिसका सीधा लाभ राज्य को मिलेगा. आगामी बजट में उद्योगों के लिए विशेष घोषणाएं होने के संकेत भी उन्होंने दिए हैं.
दूसरी ओर, शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव के संकेत देते हुए उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य शिक्षा व्यवस्था को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना और बंगाल के खोए हुए गौरव को पुनर्स्थापित करना है. उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारी घुटन भरे माहौल में काम कर रहे थे.
वामपंथ और तृणमूल शासन की नीतियों की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि कॉलेज और विश्वविद्यालयों में प्रयोगशालाओं तथा पुस्तकालयों की जगह गलत गतिविधियों ने ले ली थी. उन्होंने राज्य के युवाओं को भरोसा दिलाया कि अब एसएससी (SSC), पीएससी (PSC), सीएससी (CSC) और पुलिस भर्ती समेत नगर निकायों और पंचायतों के सभी स्तरों पर पारदर्शी व योग्यता आधारित नियुक्तियां सुनिश्चित की जाएंगी.
इसी क्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन ने भी पदभार संभाला और कहा कि वे खुद एक शिक्षक और विधायक रहे हैं, इसलिए पहले पूरी व्यवस्था को बारीकी से समझेंगे और फिर सुधारात्मक कदम उठाएंगे.
राज्य की वित्तीय स्थिति को पटरी पर लाने के लिए वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया. उन्होंने पश्चिम बंगाल की वर्तमान आर्थिक स्थिति की तुलना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के तबाह हो चुके जर्मनी से की. वित्त मंत्री ने कहा कि जैसे जर्मनी को पुनर्जीवित करने के लिए एक विशेष योजना की आवश्यकता पड़ी थी, वैसे ही बंगाल की अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए एक 'मार्शल प्लान' की जरूरत हो सकती है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे राजस्व बढ़ाने के लिए जनता पर करों का बोझ बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं, बल्कि कर चोरी रोकने और कर ढांचे को तर्कसंगत बनाकर राजस्व बढ़ाने का प्रयास करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि कई बार करों की दरें कम करने से भी राजस्व में वृद्धि होती है और वे इसी दिशा में काम करेंगे. वित्त मंत्री जमीनी स्तर की आर्थिक समस्याओं को समझने के लिए जल्द ही सिलीगुड़ी का दौरा कर चाय बागान श्रमिकों से भी बातचीत करेंगे.