US सैन्य ठिकानों पर ईरानी हमलों में रूसी हाथ ?
नई दिल्ली । डेस्क: मनीला में दक्षिण पूर्व एशियाई देशों (आसियान) के शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मारको रुबियो और उनके रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में यूक्रेन युद्ध मुख्य एजेंडा रहा. हालांकि, यह वार्ता उन हालिया खुफिया रिपोर्टों की छाया में आयोजित की गई, जिनमें यह संकेत दिया गया है कि मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य और खुफिया ठिकानों पर ईरान द्वारा किए गए सटीक हमलों में रूस पर्दे के पीछे से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध की शुरुआत के बाद से ही ऐसे दावे सामने आ रहे हैं कि तेहरान अमेरिका के केंद्रीय खुफिया एजेंसी (सीआईए) से जुड़े परिसरों को निशाना बना रहा है. सऊदी अरब के रियाद में स्थित अमेरिकी दूतावास में सीआईए स्टेशन पर हुए हमलों और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी कर्मियों व विमानों की सटीक लोकेशन का पता लगाने के पीछे रूसी खुफिया सहायता की आशंका जताई गई है.
रॉयटर्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, सीआईए सुविधाओं पर ईरानी ड्रोन हमलों की अभूतपूर्व सटीकता ने अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को रूसी संलिप्तता की जांच करने के लिए प्रेरित किया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के पास उन्नत सैन्य-ग्रेड उपग्रह क्षमताओं की कमी है, जिसे पूरा करने के लिए उसने रूस के साथ समझौता किया हो सकता है. इसके अलावा, रूस द्वारा ईरानी शाहेद-136 ड्रोन में 'कोमेटा-एम' एंटी-जैमिंग नेविगेशन सिस्टम प्रदान करने के भी दावे किए गए हैं, हालांकि मॉस्को ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है.
रूस और ईरान के बीच गहराते सैन्य संबंध अब केवल एक रणनीतिक तालमेल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देश वैश्विक पटल पर एक-दूसरे पर अधिक निर्भर हो गए हैं.
फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद तेहरान ने मॉस्को को शाहेद ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें प्रदान की थीं, जिसके बाद दोनों देशों ने 20 साल के रणनीतिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए.
विश्लेषकों के अनुसार, मध्य पूर्व में अमेरिका का उलझना मॉस्को के हित में है क्योंकि इससे वैश्विक ध्यान यूक्रेन युद्ध से हटता है और अमेरिकी सैन्य शक्ति पर दबाव बनता है. मॉस्को ईरान को सीधे पतन से बचाते हुए अमेरिका को वैश्विक स्तर पर कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहा है.
वर्तमान में मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच सीधे हमले तेज हो गए हैं, जहां एक ओर अमेरिका लगातार हवाई हमले कर रहा है, वहीं ईरान भी खाड़ी देशों और जॉर्डन में स्थित ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई कर रहा है.
हालांकि, सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि यद्यपि रूसी उपग्रह डेटा और तकनीक ने ईरान को कुछ बढ़त जरूर दी है, लेकिन ईरान की अपनी मजबूत मिसाइल और ड्रोन क्षमताएं ही इस क्षेत्रीय संघर्ष का मुख्य आधार बनी हुई हैं.