SC: जेलों में बढ़ती भीड़ 3 माह में घटाएं, 'ओपन जेल' में महिलाओं को भी मिले जगह
नई दिल्ली । डेस्क: देश की जेलों में बढ़ती भीड़ और कैदियों की दयनीय स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तीन महीने के भीतर कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है. न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने स्पष्ट किया है कि जिन राज्यों में 'ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशंस' (OCI) यानी खुली जेलें नहीं हैं, वे जल्द से जल्द इनके निर्माण के लिए बुनियादी ढांचे का आकलन करें.
अदालत ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में महिला कैदियों को खुली जेलों का लाभ नहीं दिया जा रहा है, जो कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के तहत समानता के अधिकार का सीधा उल्लंघन है.
अदालत ने कहा कि खुली जेलों से महिलाओं को बाहर रखना न केवल लैंगिक भेदभाव है, बल्कि यह अनुच्छेद 21 के तहत उनके गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का भी हनन है.
दिल्ली, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में कागजों पर तो महिलाएं पात्र हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि एक भी महिला कैदी को वहां स्थानांतरित नहीं किया गया है.
सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड सहित उन सभी राज्यों को फटकार लगाई है जहाँ एक भी खुली जेल कार्यात्मक नहीं है.
अदालत ने आदेश दिया है कि मौजूदा बंद जेलों के भीतर भी जहाँ संभव हो, खुले और अर्ध-खुले बैरक बनाए जाएं ताकि कैदी अपने परिवार के साथ रह सकें और काम कर सकें, जिससे जेलों का बोझ कम हो और सुधार की प्रक्रिया प्रभावी हो सके.