SC में लंबित मामलों की संख्या 88,000 के पार, बढ़ रही है पेंडेंसी
नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या हाल के वर्षों में अपने उच्चतम स्तर 88,417 पर पहुंच गई है, जबकि कोर्ट वर्तमान में अपनी पूर्ण स्वीकृत न्यायिक शक्ति, यानी 34 जजों के साथ कार्य कर रहा है. नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (एनजेडीजी) के अनुसार, कोर्ट में वर्तमान में 69,553 सिविल मामले और 18,864 आपराधिक मामले लंबित हैं. अगस्त में नए मामलों की फाइलिंग ने निपटारे की दर को पीछे छोड़ दिया.
अगस्त में कुल 7,080 मामले दायर किए गए, जबकि कोर्ट केवल 5,667 मामलों का निपटारा कर सका, जो दायर मामलों का 80.04% है.
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने लंबित मामलों को कम करने के लिए गर्मी की छुट्टियों के दौरान अधिक बेंचों को काम करने का निर्णय लिया था, लेकिन इसके बावजूद पेंडेंसी में वृद्धि जारी है.
इस साल मई 23 से जुलाई तक गर्मी की छुट्टियों को 'आंशिक कार्य दिवस' का नाम दिया गया था. इस दौरान मुख्य न्यायाधीश और पांच वरिष्ठतम जजों ने पहली बेंचों की अध्यक्षता की, और कुल 21 बेंचों ने बैचों में काम करते हुए मामलों का निपटारा किया.
2025 में अब तक 52,630 मामले दायर किए गए, जबकि 46,309 मामलों का निपटारा हुआ, जो लगभग 88% है. इस साल दो मुख्य न्यायाधीश देख चुके हैं, और तीसरे, जस्टिस सूर्या कांत, के नवंबर 2025 के अंत में शपथ लेने की उम्मीद है. पिछले साल, 2024 में, पेंडेंसी 82,000 से अधिक के शिखर पर पहुंची थी.
पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डी.वाय. चंद्रचूड़ और उनके उत्तराधिकारी जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस गवई ने कोर्ट में न्यायिक रिक्तियों को न्यूनतम रखने का प्रयास किया है.
फिर भी, महामारी के बाद से, विशेष रूप से 2023 से, लंबित मामलों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है. नवंबर 2023 में कोलेजियम के एक प्रस्ताव में कहा गया था कि "बढ़ती पेंडेंसी को देखते हुए कोर्ट में एक भी रिक्ति बर्दाश्त नहीं की जा सकती."
हाल के महीनों में सरकार ने कोलेजियम की सिफारिशों को 48 घंटों के भीतर मंजूरी दी है, फिर भी लंबित मामलों का ढेर लगातार बढ़ रहा है.