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SC ने बंगाली मुसलमानों की अवैध हिरासत पर नोटिस दिया

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15 अग. 2025, 02:25 AM 3 मिनट में पढ़ें 1

सुप्रीम कोर्ट
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नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार और आठ एनडीए शासित राज्यों को नोटिस जारी कर बंगाली मुसलमानों को अवैध रूप से हिरासत में लेने के आरोपों पर जवाब मांगा. यह कार्रवाई कथित तौर पर मई में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक "गुप्त" परिपत्र के आधार पर की जा रही है, जिसमें संदिग्ध विदेशियों को हिरासत में लेने का निर्देश दिया गया था.


ओडिशा, राजस्थान, महाराष्ट्र, दिल्ली एनसीटी, बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और हरियाणा को दो सप्ताह के भीतर जवाब देना होगा. कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार से भी इस मामले में राय मांगी है, लेकिन अगली सुनवाई की तारीख निर्दिष्ट नहीं की.


सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया और कहा कि इससे "अनपेक्षित परिणाम" हो सकते हैं. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने मौखिक रूप से टिप्पणी की, "अगर कोई घुसपैठिया अवैध रूप से घुसता है और उसे हिरासत में नहीं लिया जाता, तो वह गायब हो सकता है."


पश्चिम बंगाल के कई प्रवासी श्रमिकों, जिनमें कुछ हिंदू भी शामिल हैं, ने शिकायत की है कि इन राज्यों में पुलिस ने उनके भारतीय होने के दस्तावेज दिखाने के बावजूद उन्हें हिरासत में लिया और प्रताड़ित किया. 


पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजेपी शासित राज्यों में बंगालियों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है और इसे "बंगाली फोबिया" करार दिया है.


पश्चिम बंगाल माइग्रेंट वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड ने वकील प्रशांत भूषण और चेरील डिसूजा के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. 


याचिका में कहा गया है कि इन राज्यों में बंगाली मुसलमानों को बिना उचित जांच के संदिग्ध बांग्लादेशी मानकर हिरासत में लिया जा रहा है. कुछ मामलों में, लोगों को निर्वासित किया गया और बाद में उनकी भारतीय नागरिकता सत्यापित होने पर वापस लाया गया.


कोर्ट ने सुझाव दिया कि इस मुद्दे पर केंद्र और राज्यों को शामिल करते हुए एक नोडल एजेंसी बनाई जा सकती है. याचिकाकर्ता ने गृह मंत्रालय के 2 मई के कथित पत्र का हवाला दिया है, जिसमें संदिग्ध अवैध प्रवासियों की अंतर-राज्य सत्यापन और हिरासत को अधिकृत किया गया है.


याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह नीति संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 15 (भेदभाव निषेध), 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) और 22 (गिरफ्तारी और हिरासत से संरक्षण) के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है.


याचिकाकर्ता ने कहा, "पश्चिम बंगाल के प्रवासी श्रमिक, जो ज्यादातर निम्न-आय और असंगठित क्षेत्रों में काम करते हैं, भाषाई आधार पर सामाजिक बहिष्कार, आर्थिक असुरक्षा और अनिश्चित रहने की स्थिति का सामना कर रहे हैं."


याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि आठ राज्य नागरिकता सत्यापन के लिए उचित प्रक्रिया का पालन करने में विफल रहे हैं. गृह मंत्रालय के पत्र में 30 दिन की सत्यापन अवधि का उल्लेख है, लेकिन इसे बिना उचित सत्यापन या सुनवाई के अवसर के मनमाने ढंग से लागू किया जा रहा है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP