सुप्रीम कोर्ट: घर खाली न करने पर कटेगी ग्रेच्युटी, नहीं मिलेगा ब्याज
नई दिल्ली । डेस्क: उच्चतम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) और बोकारो स्टील प्लांट का प्रबंधन उन कर्मचारियों की ग्रेच्युटी रोकने और उसमें कटौती करने का हकदार है, जो रिटायरमेंट के 12 महीने बाद भी सरकारी आवास खाली नहीं करते हैं. जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की पीठ ने झारखंड उच्च न्यायालय के उस आदेश को पलट दिया, जिसमें कहा गया था कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों की ग्रेच्युटी नहीं रोकी जा सकती.
शीर्ष अदालत ने 'सेल ग्रेच्युटी रूल्स, 1978' का हवाला देते हुए कहा कि यदि कोई पूर्व कर्मचारी कंपनी के नियमों का पालन नहीं करता या क्वार्टर खाली नहीं करता, तो प्रबंधन को भुगतान रोकने का स्पष्ट अधिकार है.
कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई भी कर्मचारी एक साथ दो लाभ नहीं ले सकता, एक तरफ क्वार्टर पर अवैध कब्जा रखना और दूसरी तरफ रोकी गई ग्रेच्युटी पर ब्याज की मांग करना.
अदालत के अनुसार, ऐसी स्थिति में ब्याज देना अनधिकृत कब्जे को पुरस्कृत करने जैसा होगा.
हालांकि, प्रबंधन और कर्मचारियों के हितों में संतुलन बनाने के लिए कोर्ट ने अनुग्रह अवधि (Grace Period) के बाद के समय के लिए दंडात्मक किराए के रूप में 1,000 रुपये प्रति माह की राशि तय की है, जिसे अंतिम भुगतान के समय समायोजित किया जाएगाज