सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी याचिकाओं में AI के उपयोग पर जताई गंभीर चिंता
नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी याचिकाओं को तैयार करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बढ़ती निर्भरता को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची की पीठ ने इस प्रवृत्ति को "चिंताजनक" बताते हुए कहा कि इसके कारण अदालतों में फर्जी और अस्तित्वहीन कानूनी मिसालें पेश की जा रही हैं.
मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति नागरत्ना ने एक हालिया घटना का जिक्र किया, जहां एक वकील ने 'मर्सी बनाम मैनकाइंड' नामक एक ऐसे केस का हवाला दिया जो वास्तव में है ही नहीं.
अदालत ने स्पष्ट किया कि कानूनी शोध के लिए आसान माध्यमों का उपयोग सटीकता और सत्य की कीमत पर नहीं होना चाहिए. पीठ ने रेखांकित किया कि जेनरेटिव एआई (GenAI) के अनियंत्रित उपयोग से "भ्रम" (Hallucinations) पैदा हो रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप काल्पनिक निर्णय और पक्षपाती शोध सामग्री सामने आ रही है.
इससे पहले दिसंबर 2025 में भी मुख्य न्यायाधीश ने आगाह किया था कि न्यायपालिका एआई को न्याय प्रशासन प्रक्रिया पर हावी नहीं होने देगी.
अदालत ने वकीलों को सचेत किया कि कानूनी ड्राफ्टिंग के लिए एआई का सहारा लेना पूरी तरह से अनुचित है, क्योंकि यह न केवल न्यायिक समय को बर्बाद करता है बल्कि न्याय प्रणाली की शुचिता को भी खतरे में डालता है.