SC ने खारिज की प. बंगाल सरकार की याचिका
नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें सिंगुर में टाटा मोटर्स के कारखाने के लिए 765.78 करोड़ रुपये के मुआवजे के मामले को चुनौती दी गई थी. शीर्ष अदालत ने कोलकाता हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें कहा गया था कि इस मामले की सुनवाई हाई कोर्ट में होगी. अगली सुनवाई 12 अगस्त को जस्टिस अनिरुद्ध राय की बेंच में होगी.
गौरतलब है कि 2006 में पश्चिम बंगाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने हुगली के सिंगुर में टाटा की नैनो कार फैक्ट्री की घोषणा की थी. इसके लिए टाटा को 1000 एकड़ जमीन दी गई थी.
हालांकि, यह प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सका. ममता बनर्जी की सरकार ने टाटा से जमीन वापस मांगी, जिसे टाटा ने लौटाने की सहमति दी, लेकिन जमीन लौटाने और निवेश के खर्च की मांग की. राज्य सरकार इस मांग से सहमत नहीं हुई, जिसके बाद मामला अदालत में पहुंचा.
30 अक्टूबर 2023 को तीन सदस्यीय मध्यस्थता अदालत ने टाटा मोटर्स को 765.78 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया.
इसके साथ ही 1 सितंबर 2016 से मुआवजा वसूल होने तक 11% ब्याज देने का भी निर्देश दिया गया. टाटा समूह ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में एक बयान जारी कर इस फैसले का स्वागत किया.
राज्य सरकार ने मध्यस्थता अदालत के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त जज वीएस सिरपुरकर पर टाटा मोटर्स के साथ निकटता और पक्षपात का आरोप लगाया.
सरकार ने दावा किया कि सुनवाई के दौरान सिरपुरकर टाटा समूह के विभिन्न आयोजनों में दिखाई दिए. इस आधार पर राज्य ने हाई कोर्ट में मध्यस्थता अदालत के फैसले को रद्द करने की मांग की.
हालांकि, 19 जून को जस्टिस अनिरुद्ध राय ने इस याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि आरोपों का कोई कानूनी आधार नहीं है.
राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. शुक्रवार को जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच ने हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और राज्य की याचिका खारिज कर दी.
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुआवजे से संबंधित मामले की सुनवाई कोलकाता हाई कोर्ट में होगी.
सिंगुर मामला पश्चिम बंगाल की औद्योगिक नीतियों और निवेश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना है.
टाटा मोटर्स और राज्य सरकार के बीच यह कानूनी लड़ाई अब कोलकाता हाई कोर्ट में अपने अंतिम चरण में है.