सुप्रीम कोर्ट: डॉक्टर की मौत के बाद भी परिजनों को देना होगा हर्जाना
नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी डॉक्टर पर चिकित्सा संबंधी लापरवाही (Medical Negligence) का आरोप है और कार्यवाही के दौरान उसकी मृत्यु हो जाती है, तब भी उसके कानूनी वारिस या प्रतिनिधियों को मुआवजे के लिए उत्तरदायी ठहराया जा सकता है.
जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस एस. अतुल चंदरकर की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि डॉक्टर की मृत्यु के बाद भी 'मुकदमा करने का अधिकार' (Right to Sue) खत्म नहीं होता है. अदालत ने स्पष्ट किया कि भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 की धारा 306 और नागरिक प्रक्रिया संहिता (CPC) के प्रावधानों के तहत मृतक डॉक्टर की संपत्ति के विरुद्ध दावों के लिए उनके उत्तराधिकारियों को कार्यवाही में शामिल किया जा सकता है.
यह मामला बिहार के मुंगेर के एक नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. लाल से जुड़ा है, जिन पर एक मरीज की आंखों की रोशनी जाने के बाद लापरवाही का आरोप लगा था. जिला उपभोक्ता फोरम ने डॉक्टर को हर्जाना भरने का आदेश दिया था, लेकिन कार्यवाही के दौरान डॉक्टर की मृत्यु हो गई.
जब मामला राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) पहुँचा, तो डॉक्टर की पत्नी और बेटे ने खुद को पक्षकार बनाए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.
सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा कि लापरवाही साबित होने की स्थिति में मृतक की संपत्ति से मुआवजे की वसूली की जा सकती है, इसलिए कानूनी वारिसों को कार्यवाही का हिस्सा बनाना पूरी तरह वैध है. अदालत ने अब NCDRC को मामले की मेरिट पर सुनवाई कर अंतिम आदेश पारित करने का निर्देश दिया है.