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पत्नी की बेवफाई साबित करने को DNA टेस्ट को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी

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20 अग. 2026, 01:53 AM 2 मिनट में पढ़ें 1

सुप्रीम कोर्ट
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नई दिल्ली । डेस्क: वैवाहिक विवादों में बच्चे की पितृत्व जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि भले ही विवाह के दौरान जन्मे बच्चे को आमतौर पर कानूनी रूप से वैध माना जाता है, लेकिन अगर पति अपनी पत्नी के व्यभिचार (Unchastity) के आधार पर तलाक की मांग कर रहा है, तो ऐसी स्थिति में बच्चे का डीएनए (DNA) टेस्ट कराया जा सकता है.


यह फैसला न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने एक महिला की उस याचिका को खारिज करते हुए सुनाया, जिसमें उसने अपने बच्चे के डीएनए परीक्षण का विरोध किया था. 


महिला का तर्क था कि कानून के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार किसी भी पक्ष को जबरन डीएनए टेस्ट के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, इसलिए उसके पति की तलाक की अर्जी पर इस टेस्ट के बिना ही फैसला होना चाहिए. 


इस पर सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने टिप्पणी की, "यदि आप वफादार हैं, तो फिर आपको इस परीक्षण से क्या आपत्ति होनी चाहिए?" इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने पुणे की फैमिली कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट के उन आदेशों को बरकरार रखा, जिनमें पति द्वारा शुरू की गई तलाक की कार्यवाही के दौरान डीएनए टेस्ट कराने का निर्देश दिया गया था.


मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, पति ने पहले निजी तौर पर एक प्रयोगशाला से डीएनए टेस्ट करवाया था, जिसकी रिपोर्ट में यह साबित हुआ था कि वह बच्चे का जैविक पिता नहीं है. इस रिपोर्ट के आधार पर उसने अदालत में तलाक की अर्जी दाखिल की और अपने आरोपों को कानूनी रूप से साबित करने के लिए अदालत के निर्देश पर डीएनए परीक्षण की मांग की.


बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि पति ने हैदराबाद की लैब से प्राप्त रिपोर्ट को प्राथमिक साक्ष्य के रूप में पेश किया है, जो इस बात का पर्याप्त आधार है कि अदालत डीएनए टेस्ट का निर्देश दे. 


हाईकोर्ट का मानना था कि व्यभिचार के आरोपों को साबित करने के लिए डीएनए रिपोर्ट से बेहतर कोई प्रत्यक्ष और निर्णायक प्रमाण नहीं हो सकता. 


सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के इस विचार से सहमति जताते हुए माना कि ऐसे मामलों में 'अत्यंत आवश्यकता' (Eminent Need) का मापदंड पूरी तरह से पूरा होता है. अदालत के इस फैसले से अब तलाक की कार्यवाही के दौरान बच्चे के पितृत्व परीक्षण का मार्ग पूरी तरह से प्रशस्त हो गया है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP