SC: बिहार में हटाये गये वोटरों के नाम कारण सहित बताये
नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयोग को बिहार में विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के बाद मतदाता सूची से हटाए गए 65 लाख मतदाताओं के नाम मंगलवार, 18 अगस्त तक "ईपिक आधारित खोजने योग्य" तरीके से प्रकाशित करने का निर्देश दिया है.
जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के अंत में चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि इन मतदाताओं के नाम जिला स्तर की वेबसाइटों पर प्रदर्शित किए जाएं.
जस्टिस कांत ने आदेश में कहा, "यह प्रत्येक जिला निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जाएगा. इसमें ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल न होने का कारण भी बताया जाएगा."
पीठ ने स्पष्ट किया कि यह सूची इलेक्टर्स फोटो आइडेंटिटी कार्ड (ईपीआईसी) नंबर के आधार पर सुलभ होनी चाहिए.
कोर्ट ने कहा, "राज्य निर्वाचन अधिकारी जिला-वार मतदाता सूची की सॉफ्ट कॉपी ले सकते हैं और इसे बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर प्रदर्शित करेंगे. चुनाव आयोग सभी बूथ स्तर और जिला स्तर के अधिकारियों से अनुपालन रिपोर्ट प्राप्त करेगा और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करेगा."
चुनाव आयोग ने 25 जुलाई को एक समाचार विज्ञप्ति के माध्यम से बताया था कि ड्राफ्ट मतदाता सूची से 65 लाख नाम हटाए गए थे, जिनमें से 22 लाख मृतक थे, सात लाख का नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज था, और 35 लाख मतदाताओं का या तो पता नहीं चल सका या वे प्रवास कर चुके थे.
चुनाव आयोग, जिसे मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों को लेकर राजनीतिक विवाद का सामना करना पड़ रहा है, ने पहले सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वैधानिक ढांचे में ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल न किए गए लोगों की अलग सूची तैयार करने या इसके कारणों को प्रकाशित करने की आवश्यकता नहीं है.
केंद्रीय चुनाव पैनल ने 9 अगस्त, शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया था.