सूर्य का असली रंग सफेद: धरती से पीला दिखने का रहस्य खुला
नई दिल्ली । डेस्क: सूर्य को हमेशा से पीला या नारंगी रंग का चित्रित किया जाता रहा है चाहे स्कूल की किताबें हों, कार्टून हों या सांस्कृतिक चित्रण. लेकिन आधुनिक खगोल विज्ञान का कहना है कि यह धारणा गलत है. अंतरिक्ष से देखने पर सूर्य चमकदार सफेद रंग का गोला ही नजर आता है, न कि पीला या नारंगी.
वैज्ञानिकों के अनुसार, सूर्य पूरे वर्णक्रम में प्रकाश उत्सर्जित करता है बैंगनी, नीला, हरा, पीला और लाल सभी तरंगदैर्ध्य की रोशनी लगभग बराबर मात्रा में. जब ये रंग एक साथ मिलते हैं, तो परिणामस्वरूप सफेद प्रकाश बनता है. सूर्य को 'जी-टाइप मुख्य अनुक्रम तारा' कहा जाता है, जिसकी सतह का तापमान करीब 5,500 डिग्री सेल्सियस है. यह तापमान प्रकाश का संतुलित वितरण सुनिश्चित करता है, बिना किसी एक रंग के वर्चस्व के.
फिर धरती से सूर्य पीला या नारंगी क्यों दिखता है? इसका जवाब है पृथ्वी के वायुमंडल में 'रेले स्कैटरिंग' प्रक्रिया. वायु के अणु और सूक्ष्म कण छोटी तरंगदैर्ध्य वाली रोशनी खासकर नीली और बैंगनी को अधिक मात्रा में बिखेर देते हैं. इससे सूर्य का प्रकाश हमारी आंखों तक पहुंचते हुए नीले हिस्से में कमी आ जाती है, और बाकी प्रकाश हल्का पीला लगने लगता है.
सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यह प्रभाव और तीव्र हो जाता है, क्योंकि तब सूर्य का प्रकाश वायुमंडल की मोटी परतों से गुजरता है. नतीजा? सूर्य लाल या नारंगी रंग का दिखाई देता है. मौसम, वायु प्रदूषण या ज्वालामुखी विस्फोट जैसे कारक हवा में कणों की मात्रा बढ़ा देते हैं, जिससे रंग परिवर्तन और स्पष्ट हो जाता है. लेकिन ये सभी वायुमंडलीय प्रभाव हैं सूर्य के वास्तविक रंग से इनका कोई लेना-देना नहीं.
मानव आंख सभी दृश्यमान रंगों के संतुलन को सफेद मानती है, लेकिन वायुमंडल के कारण हल्का असंतुलन होने पर इसे पीला समझ लेती है. नासा और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियों के अवलोकनों से साबित हो चुका है कि वायुमंडल के बाहर सूर्य एक चमकदार सफेद तारा है. यह खोज न केवल हमारी धारणाओं को चुनौती देती है, बल्कि खगोल विज्ञान की समझ को और मजबूत करती है. (Symbolic Photo)