सुकमा ग्राम सभा का फैसला: ईसाइयों को जमीन देने और धर्मांतरण पर लगाई रोक
सुकमा । संवाददादा: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पुनपल्ली गांव में आयोजित एक विशेष ग्राम सभा ने ईसाई धर्मांतरण, प्रार्थना सभाओं और 'हीलिंग' (चंगाई) आयोजनों को लेकर एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है. ग्राम सभा में पारित प्रस्ताव के तहत स्पष्ट किया गया है कि गांव की सार्वजनिक या ग्राम सभा की किसी भी जमीन को ईसाइयों या धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों को दफनाने, चर्च निर्माण या धार्मिक आयोजनों के लिए नहीं दिया जाएगा. इसके साथ ही गांव के प्रवेश द्वार पर एक सार्वजनिक सूचना बोर्ड भी लगा दिया गया है, जिसमें पादरियों और ईसाई प्रचारकों के गांव में प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है.
संविधान और पेसा कानून का दिया हवाला
विशेष ग्राम सभा में लिए गए निर्णय संख्या 6 में इस कदम को जायज ठहराने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 244(1), पांचवीं अनुसूची, पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम 1996 (पेसा) और छत्तीसगढ़ के पेसा नियमों का उल्लेख किया गया है. जनपद सदस्य भीमा मरकाम और मड़कामी भीमा ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह निर्णय गांव की पारंपरिक व्यवस्था, सामाजिक एकता और सामुदायिक हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है. गांव के मुख्य द्वार पर लगे बोर्ड पर साफ शब्दों में लिखा है कि गांव की एक इंच जमीन भी ईसाई या परिवर्तित व्यक्तियों के शव दफनाने या किसी धार्मिक गतिविधि के लिए आवंटित नहीं की जाएगी.
कानूनी अधिकार और अधिकारों की सीमा पर बढ़ा विवाद
यह घटना इसलिए बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पुनपल्ली एक अनुसूचित क्षेत्र (शेड्यूल्ड एरिया) में आता है. पेसा कानून के तहत ग्राम सभाओं को आदिवासी परंपराओं, रूढ़िगत संस्कृति, सामुदायिक संसाधनों और पहचान की सुरक्षा करने के विशेष अधिकार प्राप्त हैं. हालांकि, कानूनी जानकारों के अनुसार, पेसा अधिनियम में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है जो किसी ग्राम सभा को केवल धर्म के आधार पर लोगों को सामुदायिक भूमि का उपयोग करने या गांव के सामाजिक जीवन से बेदखल करने की अनुमति देता हो. इसी वजह से इस प्रस्ताव की कानूनी वैधता और अधिकार क्षेत्र को लेकर सवाल उठने लगे हैं. बस्तर क्षेत्र में धर्मांतरण और दफनाने के अधिकारों को लेकर पहले भी कई बार झड़पें और विवाद सामने आ चुके हैं.
प्रशासन की नजर और संभावित कानूनी कार्रवाई
इस बीच मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम का संज्ञान लिया है. अधिकारियों का कहना है कि ग्राम सभा द्वारा पारित प्रस्ताव और लगाए गए नोटिस बोर्ड का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा. प्रशासन यह जांच कर रहा है कि क्या यह फैसला पेसा कानून और अन्य संवैधानिक प्रावधानों के तहत दी गई शक्तियों के दायरे में आता है या नहीं. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि ग्राम सभा का यह प्रस्ताव किसी भी कानून या संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो नियम अनुसार उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी.