आर्टेमिस II की सफल वापसी: चंद्रमा की यात्रा पूरी कर लौटे चार अंतरिक्ष यात्री
लॉस एंजिल्स । डेस्क: आधी सदी से भी अधिक समय के इंतजार के बाद, मानवता के पहले चंद्र मिशन 'आर्टेमिस II' ने शुक्रवार को प्रशांत महासागर में एक नाटकीय और सफल 'स्पलैशडाउन' के साथ अपनी वापसी दर्ज की. नासा का ओरियन कैप्सूल, जिसे 'इंटीग्रिटी' नाम दिया गया था, चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर सैन डिएगो के तट के पास समुद्र में उतरा, जिससे अंतरिक्ष अन्वेषण के एक नए युग का उदय हुआ है.
इस मिशन की कमान रीड वाइसमैन संभाल रहे थे, जबकि उनके साथ पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टिना कोच और कनाडा के जेरेमी हेंसन शामिल थे. इन चारों ने मिलकर न केवल इतिहास रचा, बल्कि भविष्य के चंद्र आधार (Moon Base) के लिए एक मजबूत नींव भी रखी है.
यह वापसी बेहद चुनौतीपूर्ण और रोमांचक थी. अंतरिक्ष यात्रियों ने ध्वनि की गति से 33 गुना अधिक रफ्तार (मैक 33) से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश किया. री-एंट्री के दौरान जब कैप्सूल लाल-तप्त प्लाज्मा से घिर गया, तो लगभग छह मिनट तक संचार पूरी तरह से ठप रहा, जिससे मिशन कंट्रोल में तनाव बढ़ गया था.
हालांकि, ओरियन की हीट शील्ड ने हजारों डिग्री के तापमान को सफलतापूर्वक झेला और कैप्सूल को सुरक्षित बाहर निकाला. रिकवरी जहाज यूएसएस जॉन पी. मुर्था और सैन्य विमानों की एक बड़ी टीम पहले से ही चालक दल के स्वागत के लिए समुद्र में तैनात थी.
करीब 10 दिनों तक चली इस यात्रा में आर्टेमिस II ने कई मील के पत्थर स्थापित किए. हालांकि यह मिशन चंद्रमा पर उतरा नहीं, लेकिन इसने अपोलो 13 का रिकॉर्ड तोड़ते हुए पृथ्वी से 2,52,756 मील की दूरी तय की, जो अब तक किसी भी इंसान द्वारा की गई सबसे लंबी दूरी है.
अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा के उस सुदूर हिस्से की तस्वीरें लीं जिन्हें पहले कभी मानवीय आंखों से प्रत्यक्ष नहीं देखा गया था. इस दौरान उन्होंने एक पूर्ण सूर्य ग्रहण का भी अनुभव किया, जिसने पूरी टीम को विस्मित कर दिया.
मिशन के दौरान चालक दल ने अपोलो 8 की प्रसिद्ध 'अर्थराइज' तस्वीर की याद दिलाते हुए चंद्रमा के पीछे से पृथ्वी के अस्त होने का सुंदर दृश्य भी साझा किया.
इस मिशन को वैश्विक स्तर पर जबरदस्त सराहना मिली है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, ब्रिटेन के किंग चार्ल्स III और 'स्टार ट्रेक' के कैप्टन किर्क यानी विलियम शैटनर जैसी हस्तियों ने इस उपलब्धि को सराहा.
तकनीकी मोर्चे पर, पेयजल प्रणाली और शौचालय में कुछ खराबी आने के बावजूद अंतरिक्ष यात्रियों का मनोबल ऊंचा रहा.
क्रिस्टिना कोच ने कहा कि गहरे अंतरिक्ष की खोज के लिए छोटे-मोटे त्याग और जोखिम उठाना जरूरी है. अब नासा की नजरें अगले साल होने वाले 'आर्टेमिस III' और 2028 के 'आर्टेमिस IV' मिशन पर हैं, जिसका लक्ष्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर इंसानों को उतारना है.