NCLT की 5-सदस्यीय पीठ के गठन का सुभाष चंद्रा ने किया विरोध
नई दिल्ली । डेस्क: एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने अपने व्यक्तिगत दिवालियापन मामले पर विचार करने के लिए राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) द्वारा 5-सदस्यीय वृहद पीठ (Larger Bench) के गठन का कड़ा विरोध किया है. राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) के समक्ष दलील देते हुए चंद्रा के वकील ने कहा कि NCLT के पास इस तरह की पांच सदस्यीय पीठ गठित करने का कानूनी अधिकार ही नहीं है.
पीठ के गठन पर वरिष्ठ वकील की तीखी आपत्तियां
चंद्रा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सस्मित पात्रा ने NCLAT के समक्ष NCLT के फैसले को पूरी तरह गलत और अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया. उन्होंने तर्क दिया कि कंपनी अधिनियम की धारा 419 के तहत मतभेद की स्थिति में मामले को अन्य सदस्यों को भेजा जा सकता है, लेकिन यह कानून NCLT को पांच सदस्यीय पीठ बनाने की शक्ति नहीं देता. पात्रा ने सवाल उठाया कि किस प्राधिकार और शक्ति के तहत इस पीठ ने इतनी जल्दबाजी में तीसरे सदस्य (टाई-ब्रेकर जज) नीलेश शर्मा के आदेश पर रोक लगा दी.
ऋणदाताओं की दलील और तीन अलग-अलग विचार
दूसरी ओर, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, केनरा बैंक और यूनियन बैंक जैसे असंतुष्ट वित्तीय लेनदारों का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि यह मामला बेहद असाधारण परिस्थितियों वाला है. इसमें तीन अलग-अलग और परस्पर विरोधी विचार सामने आए हैं, जिसके कारण एक बड़ी पीठ द्वारा इस पूरे मुद्दे की समीक्षा करना बेहद आवश्यक हो गया था.
विवाद का मुख्य आधार और बकाया राशि
मामले की पृष्ठभूमि में एस्सेल ग्रुप द्वारा ली गई उधारी पर लगभग 22,006 करोड़ रुपये के भारी-भरकम दावों का सामना करना शामिल है. वहीं, चंद्रा की तरफ से लगभग 6.5 करोड़ रुपये का भुगतान कर दावों को निपटाने की बात कही जा रही थी, जिसे लेकर देशभर में भ्रम की स्थिति बनी हुई है. पात्रा ने अदालत में स्पष्ट किया कि फिलहाल रिपेमेंट प्लान की मंजूरी देने वाला कोई अंतिम आदेश अस्तित्व में नहीं है, इसलिए उनके मुवक्किल की छवि खराब करना गलत है.
NCLAT का रुख और अगली सुनवाई की तारीख
कार्यवाहक अध्यक्ष न्यायमूर्ति योगेश खन्ना की अध्यक्षता वाली NCLAT पीठ ने स्पष्ट किया कि 5-सदस्यीय पीठ के गठन की वैधता का सवाल फिलहाल उनके समक्ष चुनौती के रूप में नहीं है. अपीलीय न्यायाधिकरण ने चंद्रा के पक्ष को निर्देश दिया कि यदि उन्हें इस पीठ से कोई शिकायत है, तो वे इसे NCLT के समक्ष ही उठाएं. सॉलिसिटर जनरल द्वारा अपील वापस न लेने के अनुरोध को स्वीकार करते हुए NCLAT ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 7 अक्टूबर की तारीख तय की है, जबकि NCLT की 5-सदस्यीय पीठ 23 सितंबर को मामले की सुनवाई करेगी.