शेयर बाजार: एक सप्ताह में निवेशकों के 16 लाख करोड़ रुपये स्वाहा
मुंबई । डेस्क: भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला सप्ताह बेहद विनाशकारी साबित हुआ है, जिसे बाजार विशेषज्ञ 'दलाल स्ट्रीट का ब्लडबाथ' करार दे रहे हैं. घरेलू शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों, निफ्टी-50 और बीएसई सेंसेक्स में इस हफ्ते 2.5 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसके चलते निवेशकों की संपत्ति में 16 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी आई है.
बाजार में मची इस अफरा-तफरी के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक जिम्मेदार रहे. सप्ताह की शुरुआत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोपीय संघ पर लगाए गए टैरिफ के खतरों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से हुई, जिससे वैश्विक बाजारों में घबराहट फैल गई.
भारतीय बाजारों में उतार-चढ़ाव इतना तीव्र था कि निफ्टी 25,000 के स्तर के करीब पहुंच गया और सेंसेक्स 81,500 के नीचे फिसल गया. साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स में 2,032.65 अंकों और निफ्टी में 645.7 अंकों की बड़ी गिरावट देखी गई. शुक्रवार को बाजार बंद होने तक बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण घटकर 451.56 लाख करोड़ रुपये रह गया.
इस गिरावट का एक बड़ा कारण भारतीय रुपये में आई ऐतिहासिक कमजोरी भी रही, जो पहली बार अंतर-दिवसीय कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले 92 के स्तर को पार कर गया. इसके साथ ही अडानी ग्रुप के शेयरों पर अमेरिकी एसईसी द्वारा समन जारी करने की खबरों ने आग में घी डालने का काम किया, जिससे अडानी समूह की कंपनियों के मार्केट कैप में 12.5 अरब डॉलर की भारी गिरावट आई.
आईसीआईसीआई बैंक और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसी दिग्गज कंपनियों के निराशाजनक तिमाही नतीजों ने कॉर्पोरेट अर्निंग में सुधार की उम्मीदों को झटका दिया है. विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का इस साल वैश्विक स्तर पर चली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रैली से बाहर रहना भी एक नकारात्मक कारक रहा है.
विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की धारणा को पूरी तरह से जोखिम-विमुख बना दिया है. अब निवेशकों की निगाहें आगामी केंद्रीय बजट और फेडरल रिजर्व के रुख पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि बाजार इस मंदी से उबर पाएगा या नहीं.
शेयर बाजार में गिरावट के प्रमुख कारण-
रुपये में ऐतिहासिक गिरावट: भारतीय रुपया पहली बार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गया. मुद्रा की इस कमजोरी ने विदेशी निवेशकों को डरा दिया और मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंका पैदा कर दी.
अडानी ग्रुप के शेयरों में भारी बिकवाली: अमेरिकी एसईसी द्वारा समन जारी करने की खबरों के बाद अडानी ग्रुप के शेयरों में 8% से 13% तक की भारी गिरावट आई. निफ्टी के कुल वेटेज में इस ग्रुप की बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण इंडेक्स तेजी से नीचे गिर गया.
निराशाजनक तिमाही नतीजे: दिग्गज कंपनियों, विशेषकर ICICI बैंक और HCL टेक के तिमाही परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे. इससे निवेशकों में यह चिंता बढ़ गई कि कॉर्पोरेट अर्निंग में सुधार अभी दूर है.
विदेशी फंडों की लगातार निकासी (FII Outflows): विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार से लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं और सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं.
ट्रंप के टैरिफ और वैश्विक तनाव: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोपीय संघ पर लगाए गए टैरिफ के खतरों और चल रहे भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता का माहौल पैदा किया है.
AI रैली में भारत की अनुपस्थिति: वैश्विक बाजारों में साल 2025-26 के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वजह से बड़ी तेजी देखी गई, लेकिन भारत में बड़ी AI कंपनियों की कमी के कारण भारतीय बाजार इस वैश्विक बढ़त का लाभ उठाने में विफल रहा.
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भारत के व्यापार घाटे और वित्तीय दबाव को बढ़ा दिया है.