फ़िलिस्तीनी कैदियों को रोकने के लिए मगरमच्छ छोड़ने के फ़ैसले पर स्टे
नई दिल्ली । डेस्क: इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार द्वारा फ़िलिस्तीनी कैदियों को भागने से रोकने के लिए केत्सियोत जेल के चारों ओर मगरमच्छों से भरी एक विशाल खाई बनाने की योजना पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. सरकार की इस योजना के तहत प्रायोगिक तौर पर जेल की खाई में खूंखार नील नदी के मगरमच्छों (नाइल क्रोकोडाइल) को छोड़ने की पूरी तोड़ाजोड़ और तैयारी कर ली गई थी.
हालांकि, येरुशलम जिला अदालत ने इस विवादित कदम पर सख्त रुख अपनाते हुए नेतन्याहू सरकार के इस फैसले पर अंतर्निहित अंतरिम रोक लगा दी है.
यह मामला तब अदालत पहुंचा जब पशु अधिकार संस्था 'लेट द एनिमल्स लिव' ने इसके खिलाफ याचिका दायर की. दिलचस्प और महत्वपूर्ण बात यह है कि अदालत में यह याचिका फ़िलिस्तीनी कैदियों के मानवाधिकार या उनकी जान के खतरे को लेकर नहीं, बल्कि संरक्षित जीवों की सुरक्षा को लेकर दी गई थी.
याचिकाकर्ता संस्था ने चिंता जताई कि 'संरक्षित वन्यजीव' की श्रेणी में शामिल नील के मगरमच्छों का कानून तोड़कर सैन्य व सुरक्षा गतिविधियों में दुरुपयोग किया जा रहा है.
इस योजना की शुरुआत जुलाई के महीने में हुई थी, जब इज़रायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन-गवीर ने पहली बार जेल के चारों ओर मगरमच्छ तैनात करने की योजना की घोषणा की थी. इसके बाद पर्यावरण संरक्षण मंत्री इदित सिलमान ने बताया कि सरकार इस प्रस्ताव को जमीन पर उतारने के लिए गंभीर है.
योजना को कानूनी रूप देने के लिए सरकार ने नील के मगरमच्छों को 'संरक्षित वन्यजीव' की सूची से हटाकर एक नई कानूनी श्रेणी में डाल दिया था, जिससे जेल प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को इन्हें पालने की अनुमति मिल सके.
नेतन्याहू सरकार के मंत्रियों विशेषकर कट्टर दक्षिणपंथी छवि वाले इतमार बेन-गवीर और इदित सिलमान के इस फैसले की न केवल घरेलू स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और वैश्विक वन्यजीव प्रेमियों द्वारा भी कड़ी आलोचना की गई थी. विभिन्न संगठनों ने इज़रायल की कई अदालतों में इस फैसले के खिलाफ याचिकाएं दायर की थीं, जिसके बाद अब अदालत के इस स्थगनादेश से सरकार की इस योजना पर फिलहाल पूरी तरह से विराम लग गया है.