एंबुलेंस नहीं दिला पा रही राज्य सरकार - हाईकोर्ट
बिलासपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ की बिलासपुर हाईकोर्ट ने मरीजों को एंबुलेंस न मिलने पर राज्य सरकार के प्रति सख्त नाराजगी जताई है.
इस मामले पर हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग और रेलवे से जवाब-तलब किया है.
दरअसल दंतेवाड़ा में एंबुलेंस के अभाव में मरीज की मौत और बिलासपुर रेलवे स्टेशन में कैंसर पीड़ित महिला का शव ले जाने के लिए एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिलने को लेकर हाईकोर्ट ने मीडिया रिपोर्ट को जनहित याचिका मानकर सुनवाई की है.
बिलासपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने कहा है कि राज्य सरकार की मुफ्त योजनओं की सुविधाएं नागरिकों को नहीं मिल पा रही हैं.
हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के सचिव और बिलासपुर रेलवे डीआरएम से जवाब मांगा है.
कोर्ट ने सवाल किया है कि व्यवस्था में सुधार के लिए क्या किया जा रहा है साथ ही इस बात की पूरी जानकारी न्यायालय में प्रस्तुत करने के लिए कहा है.
डिवीजन बेंच कहा है कि विभाग यह भी बताए कि इमरजेंसी में एंबुलेंस की सुविधा आखिर उपलब्ध क्यों नहीं हो पाती
एंबुलेंस के इंतजार में मरीज ने दम तोड़ा
दंतेवाड़ा जिले के गीदम में एंबुलेंस की देरी के चलते मरीज की मौत हो गई. मरीज के परिजन बार-बार एंबुलेंस के लिये 108 नंबर पर कॉल करते रहे.
एंबुलेंस पहुंचने में सुबह से रात हो गई. 11 घंटे तक एंबुलेंस नहीं पहुंचने के कारण इलाज में देरी हुई, जिससे मरीज की मौत हो गई.
इस घटना से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया था.
ट्रेन में हुई थी कैंसर पीड़ित महिला की मौत
दूसरा मामला बिलासपुर रेल्वे स्टेशन से जुड़ा है, जहां कैंसर पीड़ित महिला के शव को एंबुलेंस ड्राइवर ने ले जाने से मना कर दिया.
रायपुर से बिलासपुर ट्रेन में सफर कर रही एक कैंसर पीड़ित महिला रानी बाई, उम्र 62 वर्ष की मौत हो गई.
ट्रेन के बिलासपुर पहुंचने पर परिजनों ने शव को उतारकर कुली की मदद से स्ट्रेचर से गेट नंबर एक के बाहर ले आये.
वहां पर एंबुलेंस का ड्राइवर गायब था. थोड़ी देर बाद वह आया, लेकिन शव ले जाने से मना कर दिया.
महिला के परिजनों ने परिचितों के जरिए दूसरे एंबुलेंस का इंतजाम किया और वहां से एक घंटे बाद रवाना हुए. उन्हें बिलासपुर से शाम वाली ट्रेन पकड़कर बुढ़ार जाना था.
एंबुलेंस न मिलना गंभीर लापरवाही
हाईकोर्ट ने मीडिया रिपोर्ट पर जनहित याचिका मानकर सुनवाई शुरू की है. कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार कैंसर के मरीज को एंबुलेंस नहीं दिला पा रही है.
रेलवे में भी अस्पताल है. इसके बाद भी महिला को एंबुलेंस नहीं मिली.
राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि सरकार लोगों को फ्री एंबुलेंस सेवा उपलब्ध करा रही है, जिस पर डिवीजन बेंच ने कहा कि यह तो स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही है.
मरीज को एंबुलेंस नहीं मिली तो उसकी जान ही चली गई. हाईकोर्ट ने रेलवे और स्वास्थ्य विभाग से जवाब मांगा है.
सरकारी योजनाएं तो हैं पर पालन नहीं
राज्य में ऐसी कोई पहली घटना नहीं है कि मरीज को समय पर एंबुलेंस न मिला हो अथवा शव को ले जाने के लिए एंबुलेंस न मिला हो.
कई घटनाएं इससे पहले भी हो चुकी हैं जहां परिजन शव को दोपहिया वाहन में लादकर ले जाने को मजबूर हुए हैं.
इसी के साथ ही यह भी शिकायत रही है कि मरीज या घायल को ले जाने के लिये समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंचा.
स्वास्थ्य विभाग हमेशा अपनी जवाबदेही से बचता रहा है. सरकारी अस्पतालों में कुव्यवस्था के चलते गरीब आदमी भी निजी अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर होता है.
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