अमेरिकी सैन्य विमानों के लिए स्पेन का हवाई क्षेत्र बंद
नई दिल्ली । डेस्क: स्पेन सरकार ने अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ छेड़े गए युद्ध के विरोध में एक बड़ा कदम उठाते हुए अपने हवाई क्षेत्र को अमेरिकी सैन्य विमानों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया है. स्पेन की रक्षा मंत्री मार्गरीटा रोबल्स ने सोमवार को इसकी पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि स्पेन के सैन्य अड्डों या हवाई क्षेत्र का उपयोग ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं किया जा सकता.
स्पेन की रक्षा मंत्री मार्गरीटा रोबल्स ने इस युद्ध को "गंभीर रूप से अवैध और अन्यायपूर्ण" करार दिया है.
इससे पहले स्पेनिश प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने भी इस संघर्ष को "अन्यायपूर्ण और खतरनाक" बताते हुए अमेरिकी सेना को अपने दक्षिणी सैन्य अड्डों, रोटा और मोरोन के उपयोग की अनुमति देने से इनकार कर दिया था.
स्पेन के इस सख्त रुख के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मैड्रिड के साथ व्यापारिक संबंधों में कटौती करने की धमकी दी है, क्योंकि स्पेन के इस फैसले के कारण 15 अमेरिकी विमानों को अपना स्थान बदलना पड़ा है.
प्रधानमंत्री सांचेज़ के नेतृत्व में स्पेन वर्तमान में मध्य पूर्व में सैन्य कार्रवाइयों के खिलाफ यूरोप की सबसे मुखर आवाज बनकर उभरा है. इसके साथ ही, स्पेन ने इजरायल पर पूर्ण हथियार प्रतिबंध लागू कर दिया है और फिलिस्तीन को एक अलग राष्ट्र के रूप में मान्यता देकर अपने इरादे पहले ही साफ कर दिए हैं.
गौरतलब है कि स्पेन द्वारा ईरान युद्ध में शामिल अमेरिकी सैन्य विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र और सैन्य अड्डे (Rota और Morón) बंद करने का निर्णय केवल एक कूटनीतिक विरोध नहीं है, बल्कि इसके गहरे रणनीतिक और आर्थिक प्रभाव पड़ रहे हैं. इसका सबसे तात्कालिक असर अमेरिकी सैन्य लॉजिस्टिक्स (Logistics) पर पड़ा है.
स्पेन की भौगोलिक स्थिति अटलांटिक महासागर से भूमध्य सागर और मध्य पूर्व जाने वाले विमानों के लिए एक महत्वपूर्ण 'गेटवे' है. हवाई क्षेत्र बंद होने से अब अमेरिकी विमानों, विशेष रूप से यूके या अन्य यूरोपीय देशों से उड़ान भरने वाले बमवर्षक विमानों (जैसे B-52 और B-1) को स्पेन के चारों ओर से लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ रहा है.
इससे न केवल ईंधन की खपत बढ़ी है, बल्कि मिशन के समय और जोखिम में भी इजाफा हुआ है.
रणनीतिक स्तर पर, इस कदम ने नाटो (NATO) की एकता में बड़ी दरार पैदा कर दी है. स्पेन जैसे प्रमुख नाटो सहयोगी द्वारा अमेरिकी कार्रवाई को "अवैध और अन्यायपूर्ण" बताना वाशिंगटन के लिए एक बड़ा झटका है. इसके कारण अमेरिका को अपने लगभग 15 विमानों, जिनमें महत्वपूर्ण 'रिफ्यूलिंग टैंकर' भी शामिल थे, उन्हें स्पेन से हटाकर जर्मनी के रामस्टीन एयर बेस और फ्रांस जैसे अन्य देशों में स्थानांतरित करना पड़ा है.
स्पेन का यह कड़ा रुख अन्य यूरोपीय देशों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है, जिससे अमेरिका को भविष्य में इस युद्ध के लिए सामूहिक यूरोपीय समर्थन जुटाने में भारी कठिनाई हो सकती है.
आर्थिक मोर्चे पर, इसके परिणामस्वरूप अमेरिका-स्पेन संबंधों में भारी तनाव पैदा हो गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस असहयोग से नाराज होकर स्पेन के साथ "सभी व्यापारिक संबंधों को खत्म करने" और पूर्ण व्यापार प्रतिबंध (Trade Embargo) लगाने की धमकी दी है.
हालांकि, स्पेन का तर्क है कि उसकी व्यापार नीति यूरोपीय संघ (EU) द्वारा संचालित होती है, इसलिए अमेरिका एकतरफा कार्रवाई नहीं कर सकता. कुल मिलाकर, स्पेन के इस फैसले ने अमेरिका को मध्य पूर्व में अपनी सैन्य पहुंच के लिए वैकल्पिक और अधिक खर्चीले रास्ते तलाशने पर मजबूर कर दिया है और ट्रांस-अटलांटिक गठबंधन में एक अभूतपूर्व कूटनीतिक संकट खड़ा कर दिया है.