सोनम वांगचुक के अनशन को मिला बॉलीवुड का साथ
मुंबई । डेस्क: नीट पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे जाने-माने शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में अब बॉलीवुड की बड़ी हस्तियां भी आगे आ रही हैं. दिग्गज अभिनेत्री जीनत अमान और मशहूर अभिनेता ओमी वैद्य ने वांगचुक के आंदोलन का पुरजोर समर्थन किया है और सरकार से इस संवेदनशील मुद्दे पर तुरंत बातचीत शुरू करने की अपील की है.
इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी के मुताबिक, भूख हड़ताल के कारण सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा है और अब तक उनका वजन लगभग 9 किलोग्राम कम हो चुका है.
फिल्म '3 ईडियट्स' में 'चतुर रामलिंगम' का यादगार किरदार निभाने वाले अभिनेता ओमी वैद्य ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर लोगों से वांगचुक के स्वास्थ्य और उनके मुद्दों पर ध्यान देने का आग्रह किया. उन्होंने याद दिलाया कि फिल्म '3 ईडियट्स' में आमिर खान का निभाया गया 'फुंसुख वांगडू' का किरदार असल जिंदगी में सोनम वांगचुक से ही प्रेरित था.
ओमी वैद्य ने वीडियो में कहा, "मैं नहीं चाहता कि फुंसुख वांगडू की मौत हो. क्या आप जानते हैं कि यह किरदार लद्दाख के एक असली इंजीनियर, इनोवेटर और सुधारक सोनम वांगचुक पर आधारित है? मैं उनसे मिल चुका हूं और वह बेहद प्रभावशाली इंसान हैं. इस समय वह एक लंबी भूख हड़ताल पर हैं और उनका ब्लड शुगर काफी गिर गया है. वह शिक्षा, लद्दाख की स्वायत्तता और पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को उठा रहे हैं. आप उनसे सहमत हों या न हों, लेकिन हमें यह समझने के लिए वक्त निकालना चाहिए कि आखिर मामला क्या है."
दूसरी ओर, अनुभवी अभिनेत्री जीनत अमान ने भी इंस्टाग्राम पर एक भावुक पोस्ट लिखकर सोनम वांगचुक के प्रति अपनी चिंता व्यक्त की. उन्होंने लिखा कि वांगचुक की भूख हड़ताल को 17 दिन हो चुके हैं, जिससे उनके शरीर की मांसपेशियों को नुकसान पहुंच रहा है और वह अत्यधिक दर्द में हैं.
जब वांगचुक से अनशन तोड़ने को कहा गया, तो उनका जवाब था, 'मुझसे अनशन खत्म करने के लिए मत कहिए, बल्कि सरकार से पूछिए कि वे बातचीत क्यों नहीं कर रहे हैं.'
जीनात अमान ने भारत सरकार से अपील करते हुए कहा, "मैं भारत सरकार से इस मामले पर बातचीत का रास्ता खोलने का आग्रह करती हूं, क्योंकि यह देश के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है. हमें ऐसा समाज नहीं बनना चाहिए जो अपने सबसे बेहतरीन दिमागों को इस तरह खोते हुए चुपचाप देखता रहे. भारत का शांतिपूर्ण आंदोलन का एक लंबा इतिहास रहा है और सत्ता में बैठे लोगों की यह जिम्मेदारी है कि वे ऐसे शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का जवाब शांतिपूर्ण बातचीत से दें."