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बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन: दुनिया भर में कड़े कानून की तैयारी

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15 जून 2026, 03:46 PM 3 मिनट में पढ़ें 2

सोशल मीडिया
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नई दिल्ली । डेस्क: बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच दुनिया भर की सरकारें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई करने जा रही हैं. सोशल मीडिया की लत और इसके हानिकारक प्रभावों से नाबालिगों को बचाने के लिए कई देशों ने उम्र सीमा तय करने और कड़े प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है. इस वैश्विक अभियान की कमान संभालते हुए ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने घोषणा की है कि ब्रिटेन 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया साइटों को पूरी तरह से प्रतिबंधित करेगा. 


इसके साथ ही गेमिंग और लाइवस्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर भी कड़े अंकुश लगाए जाएंगे. ब्रिटेन इस साल क्रिसमस तक इस कानून को मंजूरी देने की योजना बना रहा है, जिसे वसंत 2027 तक लागू कर दिया जाएगा. इतना ही नहीं, ब्रिटेन ने टेक कंपनियों को बच्चों के फोन पर अश्लील तस्वीरों के प्रसार को रोकने के लिए तकनीकी समाधान खोजने की भी चेतावनी दी है.

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इस तरह का सख्त कानून बनाने वाला ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश है, जिसने दिसंबर 2025 में ही 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए टिकटॉक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स को पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया था. नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर वहां भारी जुर्माने का प्रावधान है. 


अब इसी राह पर चलते हुए मलेशिया ने भी 1 जून से 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट रजिस्ट्रेशन पर रोक लगा दी है. भारत में भी इस दिशा में गंभीरता से विचार चल रहा है. 


इस साल जनवरी में भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को 'हिंसक और शिकारी' बताते हुए बच्चों के लिए आयु प्रतिबंध लगाने की वकालत की थी, जिसके ठीक दो दिन पहले गोवा सरकार ने ऑस्ट्रेलिया की तर्ज पर ही प्रतिबंध लगाने की इच्छा जताई थी.


यूरोप के कई देश भी बच्चों को इस डिजिटल जाल से बाहर निकालने के लिए कानून बना रहे हैं. फ्रांस की नेशनल असेंबली ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसे अब अंतिम मुहर के लिए सीनेट में भेजा गया है. 


डेनमार्क, पोलैंड, स्लोवेनिया, स्वीडन और तुर्की भी 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया को पूरी तरह प्रतिबंधित करने या आयु सत्यापन प्रणाली को अनिवार्य करने के लिए नए विधेयकों पर काम कर रहे हैं.


वहीं, जर्मनी और इटली जैसे देशों में माता-पिता की सहमति को अनिवार्य बनाया गया है. पूरे यूरोपीय संघ (ईयू) के स्तर पर भी एक व्यापक रणनीति तैयार की जा रही है, जिसके तहत डिजिटल फेयरनेस एक्ट लाकर सोशल मीडिया के 'लत लगाने वाले डिजाइनों' पर लगाम कसी जाएगी.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP