SIR: सुप्रीम कोर्ट ने विपक्ष के दावों को नकारा
SIR: SC ने विपक्ष के दावों को नकारा
नई दिल्ली । डेस्क: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को चुनाव आयोग द्वारा शुरू किए गए विशेष गहन संशोधन (SIR) चुनावी रोल को "नागरिकता की जाँच" और "लोकतंत्र के लिए खतरा" बताने पर विपक्षी दलों से सवाल किया. मुख्य न्यायाधीश-पदनामित जस्टिस सूर्य कांत ने कहा कि यह सिर्फ चुनावी रोल को संशोधित करने की एक सामान्य प्रक्रिया है, न कि देश में पहली बार हो रहा कोई बड़ा बदलाव.
तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके (प्रतिनिधित्व: कपिल सिब्बल) और पश्चिम बंगाल के सांसदों ने वर्तमान SIR 2.0 प्रक्रिया को "फर्जी अभ्यास" बताते हुए इसकी समय-सीमा पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि पिछली बार के तीन साल के मुकाबले, EC इसे एक महीने में पूरा करना चाहता है, जिससे लाखों मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं.
सिब्बल ने EC द्वारा SIR के लिए पहचान दस्तावेज़ों की सूची में बिहार के चुनावी रोल के उद्धरण को शामिल करने पर भी सवाल उठाया, यह पूछते हुए कि इसका तमिलनाडु के चुनावों से क्या लेना-देना है.
विपक्षी दलों और NGO एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने पारदर्शिता के लिए मतदाताओं को पावती पर्ची (acknowledgement slips) देने और डुप्लीकेट/मृत मतदाताओं को हटाने के लिए डी-डुप्लीकेशन सॉफ्टवेयर का उपयोग करने की मांग की. हालांकि, जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने मशीन-पठनीय मतदाता सूचियों को जारी करने पर मतदाता गोपनीयता के उल्लंघन की आशंका व्यक्त की.
कोर्ट ने इस मामले में चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है और अगली सुनवाई 26 नवंबर को होगी.