SIR भय से पश्चिम बंगाल में मौत का सिलसिला जारी: बुजुर्ग का निधन
कोलकाता । डेस्क: पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के दत्तपुकुर में गहन मतदाता सूची संशोधन (SIR) के डर से एक और मौत का मामला सामने आया है. मृतक की पहचान 70 वर्षीय जियार अली के रूप में हुई है. परिवार का दावा है कि SIR की घोषणा के बाद से ही वह बहुत चिंतित थे. उन्हें यह डर सता रहा था कि SIR फॉर्म में कोई गलती होने पर उन्हें बांग्लादेश भेज दिया जाएगा. इसी तनाव और डर के कारण उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हुआ और शनिवार को इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई.
दत्तपुकुर थाना क्षेत्र के पश्चिम खिलग़ापुर ग्राम पंचायत के चाटुरिया इलाके के निवासी जियार अली के परिवार ने बताया कि वह SIR फॉर्म भरने को लेकर काफी भयभीत थे. उन्हें लगता था कि फॉर्म में कोई भी त्रुटि उन्हें या उनके परिवार को देश से बाहर करा सकती है. जियार अली का नाम 2002 की SIR सूची में था, लेकिन उनके पास EPIC नंबर (वोटर कार्ड नंबर) नहीं था, जिससे उनकी चिंता बढ़ गई थी. बाद में जब उन्हें SIR फॉर्म मिला, तो उसमें EPIC नंबर देखकर वह और भी भ्रमित हो गए.
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, जियार अली को गुरुवार को ब्रेन स्ट्रोक हुआ. पहले उन्हें बारासात मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ले जाया गया, लेकिन हालत बिगड़ने पर उन्हें कोलकाता रेफर कर दिया गया, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया.
मृतक की बेटी मासूदा बीबी ने स्पष्ट रूप से दावा किया है कि उनके पिता की मृत्यु SIR के डर के कारण हुई है. मासूदा ने कहा, "वह हर दिन फोन करके कहते थे कि SIR फॉर्म भरने में कोई गलती नहीं होनी चाहिए, वरना वे हमें बांग्लादेश भगा देंगे."
जियार अली की मृत्यु की खबर मिलने के बाद राज्य के खाद्य मंत्री रथींद्र नाथ घोष, मध्यमग्राम नगर पालिका के चेयरमैन निमाई घोष, पंचायत प्रधान हलीमा बीबी समेत स्थानीय तृणमूल नेताओं ने उनके परिवार से मुलाकात की. मंत्री रथींद्र घोष ने भी दावा किया कि जियार अली SIR के भय से बीमार पड़ गए थे, जिससे उनकी मृत्यु हुई.
गौरतलब है कि 27 अक्टूबर को राज्य में SIR की घोषणा के बाद से अब तक कथित तौर पर कुल 20 लोगों की मौत हो चुकी है. इन मौतों में आत्महत्या और 'डर के कारण' बीमार होकर हुई मौतें शामिल हैं. इस मुद्दे पर राज्य में राजनीतिक खींचतान शुरू हो गई है.
भाजपा का आरोप है कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस SIR को लेकर लोगों को गुमराह करके आतंक का माहौल बना रही है. पलटवार करते हुए तृणमूल का कहना है कि सरकार के निर्देश पर कोई भी नागरिक अपनी नागरिकता नहीं खो रहा है, बल्कि भाजपा ही आम जनता को भ्रमित कर रही है.