SIR: बिहार के अनुभव के बाद चुनाव आयोग ने संशोधित किए नियम
नई दिल्ली । डेस्क: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने आगामी 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होने वाले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के लिए अपने नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं. ये बदलाव हाल ही में बिहार में संपन्न हुई इसी प्रक्रिया से मिले अनुभवों के आधार पर किए गए हैं.
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, ECI ने सभी 12 राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को एक नोटिस जारी कर निर्देश दिया है कि प्रगणन चरण के दौरान मतदाताओं से कोई भी दस्तावेज़ एकत्र नहीं किया जाएगा.
यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि बिहार में यह पाया गया कि अधिकांश मतदाता पिछले SIR की मतदाता सूचियों में ट्रेस किए जा सकते थे. अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से बड़ी संख्या में मतदाताओं को अपने दस्तावेज़ जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी, खासकर उन लोगों को जिनके या उनके माता-पिता/अभिभावक के नाम पिछली SIR के बाद की मतदाता सूची में मौजूद हैं.
ड्राफ्ट रोल से बाहर नामों के लिए पारदर्शी प्रक्रिया-
नोटिस में यह भी कहा गया है कि जिन मतदाताओं के 'प्रगणन फॉर्म' (Enumeration Forms) वापस नहीं आए हैं, उनके लिए बूथ लेवल अधिकारी (BLO) आस-पास के मतदाताओं से पूछताछ के आधार पर मृत्यु या दोहराव (duplication) जैसे संभावित कारणों की पहचान करेंगे और इसे दर्ज करेंगे.
चूँकि मसौदा मतदाता सूची (Draft Electoral Rolls) में केवल उन्हीं मतदाताओं के नाम शामिल होंगे जिन्होंने प्रगणन फॉर्म जमा किए हैं, इसलिए जिन मतदाताओं के नाम मसौदा सूची में शामिल नहीं हैं, उनकी बूथ-वार सूची को संबंधित पंचायत भवन/शहरी स्थानीय निकाय कार्यालयों और प्रखंड विकास अधिकारी (BDO) कार्यालयों के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित किया जाएगा. इस सूची में उनके नाम शामिल न होने के संभावित कारणों का भी उल्लेख होगा, ताकि आम जनता को इसकी जानकारी मिल सके.
आधार को पहचान के प्रमाण के रूप में शामिल किया गया-
संशोधित नियमों में आधार को 12वें दस्तावेज़ के रूप में जोड़ा गया है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, इसे केवल पहचान के प्रमाण के तौर पर स्वीकार किया जाएगा, न कि नागरिकता के प्रमाण के तौर पर.
इसके अलावा, ECI ने 'प्रगणन फॉर्म' (Enumeration Forms) और 'घोषणा फॉर्म' (Declaration Forms) में भी बदलाव किया है. दोनों में अब एक नया कॉलम शामिल किया गया है, जिसमें यह जानकारी देनी होगी कि क्या मतदाता का नाम और उसके माता-पिता या अभिभावक का नाम उस राज्य की पिछली SIR के बाद तैयार की गई मतदाता सूची में मौजूद था.
नई पंजीकरण प्रक्रिया का साथ-साथ कार्यान्वयन
प्रक्रिया में एक अन्य महत्वपूर्ण संशोधन यह है कि घर-घर प्रगणन (House to House Enumeration) के दौरान ही नए मतदाता पंजीकरण का कार्य साथ-साथ किया जाएगा. BLO को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे अपने साथ कम से कम 30 खाली फॉर्म 6 और खाली घोषणा फॉर्म लेकर चलें, ताकि नए मतदाता के रूप में नामांकन करने की इच्छा रखने वाले किसी भी व्यक्ति को वे उपलब्ध करा सकें.
जिन मतदाताओं को पिछली SIR की मतदाता सूची से नहीं जोड़ा जा सका है, उनकी पात्रता सुनिश्चित करने के लिए मसौदा मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद ही Electoral Registration officers (EROs) द्वारा उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा. साथ ही, बिहार की प्रक्रिया के विपरीत, अब सभी राज्यों की मतदाता सूचियाँ, मतदाताओं और उनके माता-पिता/अभिभावकों के नामों की मैपिंग के लिए उपलब्ध रहेंगी.