चीन में सड़कों पर बिक रही है चांदी, 1 जनवरी से निर्यात कठिन होगा
नई दिल्ली । डेस्क: चीन में सोने-चांदी के कारोबार का मतलब सिर्फ चमक-दमक नहीं, बल्कि भारी-भरकम लेन-देन भी है. इसका ताजा उदाहरण सामने आया है शेन्जेन शहर के मशहूर शुइबेई इलाके से, जहां सड़क किनारे रखी 15 किलो वजनी चांदी की एक स्लैब ने लोगों को ठहरकर देखने पर मजबूर कर दिया. यह दृश्य अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
चाँदी ले लो! चाँदी ले लो!
चीन के सबसे बड़े गोल्ड और ज्वेलरी हब, शुइबेई (水贝) शेन्ज़ेन लुओहु डिस्ट्रिक्ट में बिक रहे 15 kg SGE ‘सिल्वर स्लैब’ की एक झलक।
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शुइबेई, शेन्जेन के लुओहु डिस्ट्रिक्ट में स्थित वह इलाका है, जिसे चीन का सबसे बड़ा गोल्ड और ज्वेलरी ट्रेडिंग हब माना जाता है. यहां देशभर से ज्वेलरी निर्माता, थोक व्यापारी और बड़े निवेशक आते हैं. रोजाना टनों के हिसाब से सोना और चांदी यहां खरीदी-बेची जाती है. ऐसे में भारी वजन की चांदी या सोने की स्लैब्स का दिखना कारोबारियों के लिए सामान्य हो सकता है, लेकिन आम लोगों के लिए यह नजारा हैरान करने वाला होता है.
जिस सिल्वर स्लैब ने सबका ध्यान खींचा, वह कोई साधारण चांदी नहीं थी. यह Shanghai Gold Exchange (SGE) के मानकों पर खरी उतरने वाली सिल्वर स्लैब है, जिसकी शुद्धता आमतौर पर 99.9 प्रतिशत मानी जाती है. SGE चीन की आधिकारिक और नियंत्रित कमोडिटी एक्सचेंज है, जहां से प्रमाणित सोने-चांदी का कारोबार होता है. ऐसे में SGE स्टैंडर्ड सिल्वर का मतलब होता है भरोसा, गुणवत्ता और अंतर्राष्ट्रीय ट्रेड में स्वीकार्यता.
करीब 15 किलो वजन वाली यह सिल्वर स्लैब आमतौर पर रिटेल ग्राहकों के लिए नहीं होती. इसका इस्तेमाल बड़े ट्रेडर्स, ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और औद्योगिक जरूरतों के लिए किया जाता है. बावजूद इसके, जब यह स्लैब खुले बाजार में लोगों की नजरों के सामने आई, तो देखने वालों के लिए यह सिर्फ धातु का टुकड़ा नहीं, बल्कि बड़े कारोबार और भविष्य के निवेश की प्रतीक बन गई.
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो में लोग इस चांदी की स्लैब को कौतूहल से देखते नजर आ रहे हैं. कुछ इसे चीन की मजबूत मेटल ट्रेडिंग व्यवस्था का उदाहरण बता रहे हैं, तो कुछ इसे मेहनत और पूंजी के भारी वजन से जोड़कर देख रहे हैं. कुल मिलाकर, शुइबेई की सड़क पर दिखी यह 15 किलो की चांदी अब सिर्फ एक स्लैब नहीं, बल्कि चर्चा का केंद्र बन चुकी है.
दूसरी तरफ चीन के एक फैसले से चांदी के वैश्विक बाजार में हलचल मच गई है.
चीन ने ऐलान किया है कि 1 जनवरी 2026 से चांदी के निर्यात के लिए सरकारी लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा. यानी अब बिना सरकारी मंजूरी के चीन से चांदी बाहर भेजना संभव नहीं होगा. इस फैसले को वैश्विक सप्लाई चेन के लिए अहम माना जा रहा है.
This is not good. Silver is needed in many industrial processes.
— Elon Musk (@elonmusk) December 27, 2025
आर्थिक अखबार ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, बीते कुछ महीनों में चांदी की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है. मई तक जहां चांदी करीब 38 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी, वहीं अब इसकी कीमत 74 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच चुकी है. विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में चांदी की मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि आपूर्ति उस रफ्तार से नहीं बढ़ पा रही. मांग और आपूर्ति के इस असंतुलन ने कीमतों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है.
चीन की भूमिका इस पूरे समीकरण में बेहद अहम है. दुनिया में चांदी की रिफाइनिंग क्षमता के मामले में चीन अग्रणी देशों में शामिल है. ऐसे में उसके निर्यात पर सख्ती से वैश्विक बाजार में उपलब्धता और सीमित हो सकती है, जिससे चांदी की किल्लत और गहराने की आशंका जताई जा रही है.
चांदी का इस्तेमाल केवल आभूषणों तक सीमित नहीं है. यह आधुनिक तकनीक और हरित ऊर्जा का एक जरूरी आधार है. सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहनों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, मेडिकल मशीनों और 5G जैसी उन्नत तकनीकों में चांदी की खपत लगातार बढ़ रही है. चूंकि इसके समान कोई सस्ता और प्रभावी विकल्प मौजूद नहीं है, इसलिए सप्लाई में कमी आने पर इन क्षेत्रों में उत्पादन लागत बढ़ने और उपभोक्ताओं तक महंगे उत्पाद पहुंचने की संभावना है.
वैश्विक उत्पादन की बात करें तो मैक्सिको चांदी का सबसे बड़ा उत्पादक देश है, जो दुनिया के कुल उत्पादन का लगभग 24 प्रतिशत हिस्सा देता है. इसके बाद चीन का स्थान आता है, जिसकी हिस्सेदारी करीब 13 प्रतिशत है. पेरू, चिली और बोलीविया जैसे देश भी प्रमुख उत्पादकों में गिने जाते हैं. चीन के नए नियम लागू होने के बाद अब इन देशों पर मांग का दबाव बढ़ सकता है.
आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि अन्य उत्पादक देश इस संभावित कमी की भरपाई कैसे करते हैं और वैश्विक बाजार इस नई स्थिति के अनुसार खुद को किस तरह ढालता है.