ट्रंप के टैरिफ से झींगा किसान तबाही के मोड़ पर
नई दिल्ली । डेस्क: डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर लगाये गये टैरिफ के कारण झींगा किसान तबाही के मोड़ पर पहुंच गये हैं. उनके लिये अब अमरीका, झींगा निर्यात करना घाटे का सौदा साबित हो रहा है. इस कारण से देशी बाजार में झींगा की कीमत गिर गई है जिससे किसान अपना मूल धन भी गंवा बैठे हैं. निर्यात पर अत्यधिक निर्भरता और कीमतों में भारी गिरावट ने तटीय क्षेत्रों के किसानों को एक विनाशकारी स्थिति में धकेल दिया है.
भारत, जो इक्वाडोर के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा झींगा उत्पादक है, ने मार्च 2025 में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में $5 अरब मूल्य के जमे हुए झींगा का निर्यात किया था, जिसमें से लगभग 48 प्रतिशत अमेरिका को बेचा गया था. अमेरिका ने हाल ही में भारत पर कुल 58.26 प्रतिशत का शुल्क (जिसमें 5.77% का प्रतिकारी शुल्क और 2.49% का एंटी-डंपिंग शुल्क शामिल है) लगा दिया है, जिससे भारतीय झींगा उत्पादकों के लिए अमेरिकी बाज़ार में बने रहना मुश्किल हो गया है.
टैरिफ की घोषणा के बाद से, झींगा के फार्म दाम ₹300 प्रति किलोग्राम से गिरकर मात्र ₹230 प्रति किलोग्राम हो गए हैं. उत्पादन लागत लगभग ₹275 प्रति किलोग्राम होने के कारण, किसानों को भारी नुकसान हो रहा है. पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम के एक झींगा किसान ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अगर बाज़ार स्थिर नहीं हुआ, तो किसानों को "ज़हर" खाने पर मजबूर होना पड़ सकता है.
गिरती कीमतों के दबाव के चलते, कई किसान जोखिम लेने को मजबूर हैं. नंदीग्राम के एक किसान ने अपना ₹3,00,000 का निवेश वसूलने की उम्मीद में, बीमारियों का ख़तरा जानते हुए भी, एक ही वर्ष में झींगा की दूसरी फसल लेने का जोखिम उठाया है. आम तौर पर किसान बीमारियों के डर से ऐसा करने से कतराते हैं, क्योंकि 'वन्नामेई' (सबसे अधिक उत्पादित प्रजाति) के दो चक्र होते हैं.
इस संकट का सीधा असर हैचरियों पर भी पड़ा है. ऑल इंडिया श्रिम्प हैचरीज़ एसोसिएशन के अध्यक्ष, रविद कुमार येल्लांकी के अनुसार, डर के कारण किसानों ने झींगा के बीज खरीदना बंद कर दिया है, जिससे लगभग आधी हैचरियाँ बंद हो चुकी हैं. इन हैचरियों ने पिछले चार महीनों में लगभग सात से आठ अरब बीज नष्ट कर दिए हैं, जिनकी शेल्फ लाइफ सिर्फ तीन से चार दिन होती है.
विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च टैरिफ के कारण भारत अब इक्वाडोर से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है, जिसके लिए टैरिफ मात्र 15% है और वह अपनी घरेलू प्रजाति के कारण कम कीमत पर उच्च-गुणवत्ता वाले झींगा का उत्पादन करता है.
क्रिसिल रेटिंग्स के राहुल गुहा जैसे विश्लेषकों का मानना है कि टैरिफ में वृद्धि से किसान झींगा पालन में निवेश करने से हतोत्साहित होंगे. अनुभवी झींगा विशेषज्ञ मनोज शर्मा ने सुझाव दिया है कि भारतीय निर्यातकों को अब वैकल्पिक बाज़ारों, विशेषकर घरेलू भारतीय बाज़ार, पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जिसमें अपार संभावनाएं हैं. (AI Generated symbolic photo)