फार्मा कंपनियों से लीगल नोटिस के बाद डॉ. शिवरंजनी का IAP से इस्तीफा
हैदराबाद । डेस्क: हैदराबाद की जानी-मानी बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवरंजनी संतोष ने इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (IAP) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. डॉ. संतोष ने यह कदम तब उठाया जब कुछ फार्मास्युटिकल कंपनियों द्वारा उन्हें कानूनी नोटिस भेजे जाने के बाद एकेडमी ने उनका साथ देने से इनकार कर दिया.
पूरा विवाद कुछ 'ओरल रीहाइड्रेशन' उत्पादों (जैसे ORSL और इसका नया संस्करण ERZL) के मार्केटिंग और विज्ञापनों पर डॉ. संतोष द्वारा उठाए गए सवालों से शुरू हुआ. उन्होंने सार्वजनिक रूप से इन उत्पादों के बच्चों पर होने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी, जिसके बाद कंपनियों ने उन्हें लीगल नोटिस थमा दिया.
डॉ. संतोष का कहना है कि उन्होंने वैश्विक बाल चिकित्सा निकायों के उन सुझावों का हवाला दिया था, जो बच्चों में कृत्रिम मिठास के लंबे समय तक उपयोग को लेकर सावधानी बरतने की सलाह देते हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की सामग्री से बच्चों के 'गट माइक्रोबायोटा' (पेट के बैक्टीरिया) और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है, जिससे भविष्य में मधुमेह जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.
डॉ. संतोष ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जब उन्हें संस्थागत समर्थन की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब IAP उनके साथ खड़ी नहीं हुई.
उन्होंने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि अब बहुत हो चुका है, इसलिए उन्होंने कुछ दिन पहले ही अपना इस्तीफा सौंप दिया. यह मामला अब चिकित्सा जगत में नैतिकता और कॉर्पोरेट दबाव के बीच डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर एक नई बहस का कारण बन गया है.