सोनम वांगचुक से शशि थरूर ने की अनशन तोड़ने की अपील
नई दिल्ली । डेस्क: सरकारी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के दबाव के बीच, जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 17 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं. कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन में शामिल होने के बाद से वांगचुक का वजन करीब 8.5 किलोग्राम कम हो गया है और डॉक्टरों के मुताबिक उनकी मांसपेशियों को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है.
उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए विपक्ष के कई प्रमुख नेताओं समेत कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने उनसे अनशन खत्म करने की भावुक अपील की है.
इस बीच, सोनम वांगचुक के गिरते स्वास्थ्य पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है. दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ इस मामले पर गुरुवार को तत्काल सुनवाई करने के लिए सहमत हो गई है.
बुधवार को वकीलों की हड़ताल के कारण सरकार या संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई अदालत में पेश नहीं हो सका, जिसके बाद अदालत ने मामले की गंभीरता और तात्कालिकता को देखते हुए इसे अगले दिन के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया.
याचिकाकर्ता राकेश कुमार सैनी ने अदालत से मांग की है कि सरकार को इस संवेदनशील मुद्दे पर वांगचुक से तुरंत बातचीत करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर उनके जीवन की रक्षा के लिए उन्हें जबरन लिक्विड या भोजन देने के निर्देश जारी किए जाएं.
दूसरी ओर, तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं और सोनम वांगचुक के नाम एक खुला पत्र लिखा है. थरूर ने वांगचुक से अपील करते हुए कहा कि उन्होंने देश की अंतरात्मा को जगाने का अपना बड़ा कर्तव्य पूरा कर लिया है, लेकिन अब उन्हें अपने स्वास्थ्य की खातिर अनशन समाप्त कर देना चाहिए.
थरूर ने आश्वासन दिया कि आगामी सोमवार से संसद का सत्र दोबारा शुरू हो रहा है, जहां विपक्ष पूरी ताकत के साथ देश के सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच पर छात्रों और युवाओं के इस मुद्दे को उठाएगा. उन्होंने केंद्र सरकार को भी नसीहत दी कि वह जिद छोड़कर प्रदर्शनकारी युवाओं से संवाद स्थापित करे, क्योंकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद ही सबसे बड़ा राजधर्म है.