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मानसिक रोगों का राज़: वैज्ञानिकों ने पहचाना 'GRIN2A' जीन

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06 दिस. 2025, 02:13 PM 2 मिनट में पढ़ें 1

मानसिक रोगी
मानसिक रोगी

नई दिल्ली । डेस्क: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, 2021 में पृथ्वी पर हर सात में से एक व्यक्ति किसी न किसी मानसिक समस्या, जैसे चिंता या अवसाद से जूझ रहा था. अब, वैज्ञानिकों ने इस समस्या की जड़ तक पहुंचने का दावा किया है. उनका कहना है कि मानसिक समस्याओं के पीछे जीन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, और यह आनुवंशिक संभावना पैदा करता है. हाल ही में हुए एक शोध में वैज्ञानिकों ने एक ऐसे विशिष्ट जीन की पहचान की है, जिसके सामूहिक प्रभाव से मानसिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.


जर्मनी के लाइपज़िग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की एक टीम ने इस महत्वपूर्ण जीन की खोज की है. इस दल में शामिल प्रोफेसर जोहान्स लेमके ने बताया कि उन्होंने एक ऐसे जीन का पता लगाया है, जो मानसिक समस्याओं को जन्म देता है, और उन्हें इसके लिए जिम्मेदार होने का प्रमाण भी मिला है. इस जीन का नाम जीआरआईएन२ए (GRIN2A) है.


शोध टीम ने 121 लोगों के मानसिक स्वास्थ्य डेटा का विश्लेषण किया, जिनमें सभी में जीआरआईएन२ए (GRIN2A) में परिवर्तन देखा गया. प्रोफेसर लेमके ने बताया कि जांच में पाया गया कि जीआरआईएन२ए (GRIN2A) जीन के कुछ रूपों का संबंध स्किज़ोफ्रेनिया और अन्य मानसिक बीमारियों से है. वैज्ञानिकों का मानना है कि जीआरआईएन२ए (GRIN2A) में बदलाव के कारण होने वाली बीमारियाँ अक्सर बचपन या किशोरावस्था में ही पकड़ में आ जाती हैं, न कि केवल वयस्क होने पर. सामान्य तौर पर, जीआरआईएन२ए (GRIN2A) में परिवर्तन से मिर्गी या बौद्धिक अक्षमता (intellectual disability) हो सकती है, लेकिन इन 121 लोगों में, जीन परिवर्तन मानसिक रोगों का कारण बना.


वैज्ञानिकों के अनुसार, जीजीआरआईएन२ए (GRIN2A) जीन तंत्रिका कोशिकाओं (nerve cells) को सक्रिय करता है और उनके विद्युत संकेत भेजने की क्षमता को प्रभावित करता है. शोध से पता चला कि इस जीन के कुछ रूप एनएमडीए (NMDA) रिसेप्टर की सक्रियता को कम कर देते हैं, जो मस्तिष्क की कोशिकाओं के बीच संचार और स्मृति को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. 


शोधकर्ताओं का मानना है कि इस कम हुई सक्रियता का ज्ञान उन्हें उपचार में मदद करेगा. यदि मानसिक रोगों के शुरुआती चरण में इस सक्रियता को बढ़ाने वाली दवाएं दी जाती हैं, तो रोगी की स्थिति में सुधार हो सकता है. इसलिए, वैज्ञानिकों का मानना है कि यह शोध मानसिक रोगों के उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP