एक ही टीके से खत्म होगी हर बीमारी, वैज्ञानिकों ने बनाई 'यूनिवर्सल वैक्सीन'
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी 'यूनिवर्सल वैक्सीन' विकसित करने का दावा किया है, जिसका एक ही डोज शरीर को दर्जनों तरह के वायरस और बैक्टीरिया से सुरक्षा प्रदान करेगा. यह टीका विशेष रूप से एक नेज़ल ड्रॉप के रूप में होगा, जो इन्फ्लुएंजा (ए, बी, सी और डी), निमोनिया, खसरा और चेचक जैसी बीमारियों के खिलाफ सुरक्षा कवच तैयार करेगा.
वर्तमान समय में कोविड-19 के बाद जिस तरह से वायरस के नए-नए वेरिएंट्स और 'डिजीज एक्स' जैसी भविष्य की महामारियों का खतरा बढ़ा है, उसे देखते हुए यह यूनिवर्सल वैक्सीन गेम-चेंजर साबित हो सकती है.
शोधकर्ताओं का मानना है कि जब कोई नया वायरस हमला करता है, तो उसके लिए अलग से वैक्सीन बनाने में काफी समय लगता है, जिससे मौतों का आंकड़ा बढ़ जाता है.
लेकिन यह नया टीका शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को पहले से ही इतना मजबूत कर देगा कि वह किसी भी अज्ञात संक्रमण से लड़ सके.
फिलहाल इस टीके का मानव परीक्षण शुरू हो चुका है और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को बार-बार अलग-अलग बीमारियों के टीके लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
गौरतलब है कि स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित यह 'यूनिवर्सल वैक्सीन' चिकित्सा विज्ञान की पारंपरिक सीमाओं को तोड़ने वाली एक अभूतपूर्व खोज है. 20 फरवरी 2026 को विज्ञान पत्रिका 'साइंस' में प्रकाशित इस शोध के अनुसार, यह टीका मौजूदा टीकों से बिल्कुल अलग तरीके से काम करता है.
सामान्य तौर पर कोई भी टीका शरीर को किसी एक विशिष्ट वायरस (जैसे खसरा या कोविड) की पहचान करना सिखाता है, लेकिन यह यूनिवर्सल वैक्सीन फेफड़ों की प्रतिरक्षा कोशिकाओं, जिन्हें 'मैक्रोफेज' कहा जाता है, को हाई अलर्ट मोड पर रख देती है. इससे शरीर किसी भी हमलावर वायरस या बैक्टीरिया को देखते ही तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार रहता है.
यह प्रतिषेधक मुख्य रूप से एक नेज़ल स्प्रे के रूप में नाक के माध्यम से दिया जाएगा, जो सीधे श्वसन तंत्र पर सुरक्षा कवच बनाता है. चूहों पर किए गए परीक्षणों में पाया गया कि इस टीके के मात्र दो से तीन डोज देने पर वे इन्फ्लुएंजा, सार्स-कोव-2 (कोविड-19) और गंभीर निमोनिया पैदा करने वाले बैक्टीरिया (Staphylococcus aureus) से पूरी तरह सुरक्षित रहे.
चौंकाने वाली बात यह है कि यह स्प्रे न केवल बीमारियों से बचाता है, बल्कि धूल के कणों से होने वाली एलर्जी और अस्थमा के खतरे को भी कम करता है.
शोध के अनुसार, चूहों में इस टीके का प्रभाव लगभग तीन से छह महीने तक देखा गया, जिससे यह भविष्य में एक 'सीजनल स्प्रे' के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. यह तकनीक 'डिजीज एक्स' जैसी भविष्य की अज्ञात महामारियों के खिलाफ एक त्वरित सुरक्षा कवच का काम कर सकती है.
वर्तमान में इसके क्लिनिकल ट्रायल (Phase I) की योजना बनाई जा रही है और वैज्ञानिकों का अनुमान है कि मानवीय परीक्षण सफल रहने और पर्याप्त फंडिंग मिलने पर यह अगले 5 से 7 वर्षों के भीतर आम जनता के लिए उपलब्ध हो सकता है. हालाँकि, शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यह टीका पारंपरिक टीकों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उनके साथ मिलकर सुरक्षा की एक अतिरिक्त और व्यापक परत प्रदान करेगा.