सोम, 19 अक्टू. 2026

CGKhabar

SC ने CJP आंदोलन से जुड़ीं FIR रद्द की, NEET 2026 पीड़ित परिवारों को मुआवजे का निर्देश

C

CG Khabar

01 सित. 2026, 09:51 AM 4 मिनट में पढ़ें 6

सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हालिया शैक्षणिक मुद्दों और पेपर लीक को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेतृत्व में हुए आंदोलनों के सिलसिले में दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और असम पुलिस द्वारा दर्ज कई प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) को निरस्त कर दिया है. प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का उपयोग कर यह आदेश सुनाया. इसके साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इन पांच राज्यों के अलावा अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज ऐसी ही FIR पर भी अब कोई जांच या कार्रवाई नहीं की जाएगी और उन्हें सभी उद्देश्यों के लिए बंद माना जाएगा.


छात्रों के भविष्य और पूर्ण न्याय का हवाला


शीर्ष अदालत ने प्रदर्शनकारी छात्रों के हित में फैसला सुनाते हुए टिप्पणी की, "उन युवा प्रदर्शनकारियों के भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए, जो कुछ मांगों के समर्थन में अपनी आवाज उठाने के लिए एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में भाग लेने आए थे, हम पक्षों के बीच पूर्ण न्याय करने के उद्देश्य से संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का आह्वान करना उचित समझते हैं." इसके साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट निर्देश दिया कि 20 जुलाई से 25 जुलाई के बीच हुए विरोध प्रदर्शनों के संबंध में अब कोई नई प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाएगी.

विज्ञापन


NEET 2026 पीड़ितों के लिए मुआवजे की अखिल भारतीय नीति


न्यायालय ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह राज्य सरकारों के परामर्श से तीन महीने के भीतर एक राष्ट्रीय नीति तैयार करे ताकि NEET 2026 से जुड़े मामलों के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा दिया जा सके. पीठ ने कहा, "भारत सरकार एक अखिल भारतीय आधार पर मुआवजा भुगतान के संबंध में एक नीति तैयार करेगी. इस नीति को सभी संबंधित राज्य सरकारों और कार्यान्वयन अधिकारियों को प्रसारित किया जाएगा ताकि इसे मुआवजा देने के लिए एक नियमित तंत्र के रूप में अपनाया जा सके. जहां तक NEET 2026 के संबंध में आत्महत्या करने वाले छात्रों का सवाल है, नीति निर्माण के बाद प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा. नीति तीन महीने की अवधि के भीतर तैयार की जाएगी."


गंभीर अपराधियों पर अलग से मामला दर्ज करने की छूट


सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को सूचित किया कि सरकार ने CJP नेतृत्व को आश्वासन दिया था कि पुलिस 20 से 25 जुलाई के बीच हुए विरोध प्रदर्शनों के मामलों को आगे नहीं बढ़ाएगी. हालांकि, सरकार ने दिल्ली में गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,873 व्यक्तियों के खिलाफ अभियोजन जारी रखने की बात कही, जिनकी जांच केवल शारीरिक नुकसान पहुंचाने या संपत्ति के विनाश के अपराधों तक सीमित रहेगी. इसके लिए पुलिस को एक एकल और नई FIR दर्ज करने का प्रस्ताव दिया गया था. अदालत ने दिल्ली पुलिस को छूट देते हुए कहा, "ऐसी प्राथमिकी प्रभावित पक्षों के कानून में उपलब्ध उपचार की मांग करने के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना दर्ज की जा सकती है, और यह सख्ती से दो श्रेणियों के आरोपों तक सीमित होगी, अर्थात्, शारीरिक नुकसान और संपत्ति का विनाश."


5 सितंबर का दिल्ली मार्च वापस, अदालत की सराहना


केंद्र के आश्वासनों और अदालती आदेश के बाद CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने कोर्ट में बयान देकर 5 सितंबर को प्रस्तावित दिल्ली मार्च वापस लेने का ऐलान किया. सौरव दास ने कहा, "CJP के सह-संयोजक के रूप में, मैं यह बताना चाहता हूं कि भारत सरकार के सकारात्मक आश्वानों और आज उन्हें प्रदान की गई न्यायिक पवित्रता को ध्यान में रखते हुए, तथा इस न्यायालय द्वारा पारित किए जा रहे आदेश को देखते हुए, CJP 5 सितंबर को होने वाले मार्च के आह्वान को वापस लेना उचित समझती है और आज के आदेश के अनुपालन की उम्मीद करती है."


CJI सूर्य कांत ने दोनों पक्षों के इस रुख की सराहना करते हुए कहा, "यदि दोनों पक्ष सद्भावना दिखाते हैं, तो सभी मुद्दों को एक-एक करके सुलझाया जा सकता है. दुनिया में ऐसी कोई भी बात इतनी जटिल नहीं है जिस पर खुले मन से चर्चा न की जा सके." अंत में शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 142 का उपयोग मामले की विशेष परिस्थितियों के आधार पर किया गया है और इसे एक बाध्यकारी मिसाल के रूप में नहीं माना जाएगा.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP