रवि, 01 नव. 2026

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महादेव सट्टा के सौरभ चंद्राकर को CBI कल रायपुर अदालत में करेगी पेश

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित महादेव ऑनलाइन बुक सट्टेबाजी नेटवर्क के प्रमुख प्रमोटर और मुख्य आरोपियों में शामिल सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया है. सीबीआई की विशेष टीम उसे मस्कट से लेकर भारत पहुंची है.

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01 नव. 2026, 08:22 PM 7 मिनट में पढ़ें 226

महादेव ऐप, सौरभ चंद्राकर, महादेव सट्टा
महादेव ऐप, सौरभ चंद्राकर, महादेव सट्टा

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित महादेव ऑनलाइन बुक सट्टेबाजी नेटवर्क के प्रमुख प्रमोटर और मुख्य आरोपियों में शामिल सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया है. सीबीआई की विशेष टीम उसे मस्कट से लेकर भारत पहुंची है. अब चिकित्सकीय परीक्षण और ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे रायपुर ले जाया जाएगा, जहां सोमवार को सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा. 

चंद्राकर के भारत आने को विदेश में बैठकर कथित तौर पर अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क संचालित करने वाले आरोपियों के खिलाफ जांच में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है.

सीबीआई के अनुसार, चंद्राकर के खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था. इसके आधार पर ओमान के अधिकारियों ने उसे हिरासत में लिया. इसके बाद सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भारत सरकार की संबंधित एजेंसियों तथा इंटरपोल के समन्वय से ओमान को प्रत्यर्पण संबंधी औपचारिक प्रस्ताव और जांच में जुटाए गए साक्ष्य उपलब्ध कराए. ओमान की सक्षम एजेंसियों से मंजूरी मिलने के बाद सीबीआई की टीम उसे भारत लेकर आई. एजेंसी ने इस कार्रवाई में सहयोग के लिए ओमान सरकार और रॉयल ओमान पुलिस का आभार जताया है.

दो सीबीआई मामलों में आरोपपत्र, ईडी भी कर रही जांच

चंद्राकर सीबीआई के दो मामलों में वांछित है. दोनों मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं. इसके अलावा, ईडी की ओर से दर्ज धनशोधन मामले में भी उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की गई है. 

अब अदालत में पेशी के बाद आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय होगी. जांच एजेंसियों को उससे कथित सट्टेबाजी नेटवर्क की कार्यप्रणाली, पैसों के लेनदेन, विदेशों में संपत्तियों और अन्य आरोपियों की भूमिका के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है.

केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) की 9 जुलाई 2026 की विज्ञप्ति के अनुसार, सीबीआई ने महादेव ऐप से जुड़े मामलों में कई आरोपपत्र दाखिल किए हैं. 

एक मामले में छह आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के तहत कार्रवाई की गई, जबकि दूसरे मामले में 66 आरोपियों के खिलाफ पांच आरोपपत्र दाखिल किए जाने की जानकारी दी गई. इन मामलों में सौरभ चंद्राकर और उसके कथित सहयोगी रवि उप्पल के नाम भी शामिल हैं. जांच अभी जारी है. 

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भिलाई से दुबई तक फैला कथित सट्टेबाजी नेटवर्क

छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला सौरभ चंद्राकर महादेव ऑनलाइन बुक के प्रमुख प्रमोटरों में से एक है. जांच एजेंसियों के अनुसार, उसने ऑनलाइन सट्टेबाजी का बड़ा नेटवर्क खड़ा किया. आरोप है कि इस नेटवर्क का संचालन भारत के बाहर से किया जाता था और इसके जरिए देशभर में लाखों लोगों तक पहुंच बनाई गई.

महादेव ऑनलाइन बुक के नाम से संचालित इस व्यवस्था में क्रिकेट, फुटबॉल, ताश के खेल और अन्य आयोजनों पर ऑनलाइन सट्टा लगाने की सुविधा उपलब्ध कराई जाती थी. इसके लिए फ्रेंचाइजी मॉडल पर आधारित पैनल और शाखाओं का नेटवर्क बनाया गया था. 

स्थानीय स्तर पर काम करने वाले पैनल संचालक ग्राहकों को जोड़ते, उनसे सट्टे की रकम लेते और सट्टेबाजी का हिसाब रखते थे. ईडी के मुताबिक, महादेव के अलावा टाइगर एक्सचेंज, गोल्ड365 और लेजर247 जैसे प्लेटफॉर्म और डोमेन भी इस व्यापक नेटवर्क से जुड़े रहे.

जांच एजेंसियों का दावा है कि इस व्यवस्था में प्रमोटरों और पैनल संचालकों के बीच मुनाफे का बंटवारा होता था. ईडी की 25 मार्च 2026 की विज्ञप्ति के अनुसार, प्रमोटरों के पास पैनल से होने वाले मुनाफे का लगभग 70 से 75 प्रतिशत हिस्सा रहने की बात सामने आई. हालांकि, इस पूरे नेटवर्क का वास्तविक कारोबार, इससे हुई कथित कमाई और प्रत्येक आरोपी की भूमिका का अंतिम निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा.

फर्जी खातों से हवाला और क्रिप्टोकरेंसी तक पहुंचा पैसा

महादेव ऐप मामले की सबसे गंभीर कड़ियों में कथित वित्तीय लेनदेन शामिल हैं. सीबीआई और ईडी के अनुसार, सट्टेबाजी से प्राप्त रकम को सीधे एक खाते में रखने के बजाय बड़ी संख्या में ऐसे बैंक खातों के जरिए घुमाया जाता था, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर वास्तविक लाभार्थियों की पहचान छिपाने के लिए किया गया. इन खातों को जांच एजेंसियां म्यूल या डमी खाते बताती हैं.

ईडी की जांच के मुताबिक, रकम को कई चरणों में अलग-अलग खातों के बीच स्थानांतरित किया जाता था. इसके बाद कथित तौर पर हवाला और क्रिप्टोकरेंसी सहित अन्य माध्यमों से पैसा विदेश भेजा जाता था. एजेंसी का आरोप है कि इस धन का इस्तेमाल भारत और विदेशों में महंगी अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया.

जांच में सरकारी अधिकारियों को कथित तौर पर संरक्षण राशि दिए जाने का पहलू भी सामने आया है. सीबीआई के अनुसार, सट्टेबाजी से अर्जित रकम का एक हिस्सा सरकारी कर्मचारियों को भुगतान करने में इस्तेमाल किए जाने का संदेह है, ताकि नेटवर्क के संचालन में बाधाएं न आएं.

4,336 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क या जब्त

महादेव ऑनलाइन बुक मामले में ईडी देश के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर छापेमारी कर चुकी है. एजेंसी की 25 मार्च 2026 की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, मामले में अब तक 175 से अधिक परिसरों में तलाशी ली गई थी. 

उस समय तक 13 लोगों की गिरफ्तारी और विशेष अदालत में दाखिल पांच अभियोजन शिकायतों में 74 आरोपियों को शामिल किए जाने की जानकारी दी गई थी.

इसी विज्ञप्ति में ईडी ने बताया कि मामले में चल और अचल संपत्तियों की कुल कुर्की, जब्ती और फ्रीजिंग का मूल्य लगभग 4,336 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था. इनमें भारत के साथ विदेशों में स्थित संपत्तियां भी शामिल हैं.

मार्च 2026 में ईडी ने दुबई में 18 और नई दिल्ली में दो अचल संपत्तियों को कुर्क करने की कार्रवाई की थी. इन संपत्तियों का अनुमानित बाजार मूल्य लगभग 1,700 करोड़ रुपये बताया गया. ईडी के अनुसार, इनमें दुबई के प्रमुख इलाकों में स्थित आलीशान विला और अपार्टमेंट शामिल हैं. 

एजेंसी का आरोप है कि इन संपत्तियों को अवैध सट्टेबाजी से अर्जित कथित अपराध की कमाई से खरीदा गया था. हालांकि, कुर्की जांच एजेंसी की कार्रवाई है; इससे अपने आप किसी व्यक्ति का अपराध अंतिम रूप से सिद्ध नहीं हो जाता.

2023 के विधानसभा चुनाव में भी उठा था मामला

महादेव ऐप प्रकरण केवल वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बना. वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेताओं ने इस मामले को लेकर तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा था. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की चुनावी सभाओं में भी यह मुद्दा उठा.

तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी बताए जाने वाले कुछ लोगों के नाम सामने आने और कथित राजनीतिक संरक्षण के आरोपों के कारण मामला लगातार सुर्खियों में रहा. 

जांच के दायरे में पुलिसकर्मियों, नौकरशाहों, कारोबारियों और अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी पड़ताल की गई. हालांकि, किसी व्यक्ति से पूछताछ होना या उसका नाम जांच में आना अपने आप में अपराध सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है. आरोपों की पुष्टि अदालत में पेश साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही हो सकती है.

महादेव ऐप मामले में सौरभ चंद्राकर की कथित भूमिका और विदेशों में संपत्तियों की चर्चा भी लंबे समय से होती रही है. 

दुबई में उसकी भव्य शादी को लेकर वर्ष 2023 में काफी विवाद हुआ था. उस आयोजन पर भारी खर्च किए जाने की खबरों के बाद जांच एजेंसियों ने कथित अवैध कमाई और उसके इस्तेमाल की दिशा में पड़ताल तेज की थी.

प्रत्यर्पण से जांच को मिलेगी नई दिशा?

चंद्राकर का भारत लाया जाना जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण इसलिए है, क्योंकि अब उससे भारत में दर्ज मामलों के संबंध में पूछताछ और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी. जांच का एक प्रमुख पहलू यह पता लगाना होगा कि नेटवर्क के वित्तीय संचालन में किन लोगों की क्या भूमिका थी, रकम किन खातों और माध्यमों से विदेश पहुंची तथा कथित अपराध से अर्जित धन किन संपत्तियों में लगाया गया.

इसके अलावा, विदेश में मौजूद अन्य आरोपियों और सहयोगियों तक पहुंचने, पैनल संचालकों के नेटवर्क को समझने तथा कथित संरक्षण व्यवस्था से जुड़े आरोपों की जांच भी महत्वपूर्ण बनी हुई है. 

सीबीआई पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि महादेव ऐप से जुड़े मामलों में जांच जारी है और आगे और आरोपपत्र दाखिल किए जा सकते हैं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP