सऊदी अरब 14 देशों के साथ मिलकर बनाएगा बहुराष्ट्रीय नौसैनिक गठबंधन
रियाद । डेस्क: लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर यमन के हूति विद्रोहियों के बढ़ते हमलों के बीच सऊदी अरब ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है. सऊदी रक्षा मंत्रालय ने एक नए बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा गठबंधन के गठन की घोषणा की है, जिसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों, ऊर्जा आपूर्ति लाइन और जहाजों की सुरक्षा को मजबूत करना है.
इस प्रस्तावित गठबंधन का नेतृत्व सऊदी अरब खुद करेगा और इसका मुख्यालय भी रियाद में ही स्थापित किया जाएगा.
सऊदी रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय बैठक में 43 देशों और यूरोपीय संघ (EU) के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. तुर्की, पाकिस्तान, मिस्र, सूडान और जिबूती सहित 14 देशों ने इस गठबंधन का समर्थन करते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया है.
हालांकि, क्षेत्र के दो प्रमुख पड़ोसी देशों - ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) - ने फिलहाल इस संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं. यह नया गठबंधन खुफिया जानकारी साझा करने, संयुक्त नौसैनिक गश्त लगाने और समुद्री खतरों का मिलकर सामना करने पर ध्यान केंद्रित करेगा.
लाल सागर में क्यों बढ़ा तनाव?
यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब 20 जुलाई को यमन के ईरान समर्थित हूति विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा कर दी. इसके बाद से हूति लड़ाकों ने सऊदी अरब से जुड़े कई वाणिज्यिक जहाजों पर मिसाइलों और ड्रोन से हमले तेज कर दिए.
इन हमलों के जवाब में सऊदी अरब ने भी कड़ा रुख अपनाया है. सऊदी वायुसेना ने यमन के हुदैदा प्रांत में हूति विद्रोहियों के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए. सऊदी अधिकारियों का कहना है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय समुद्री जहाजों को निशाना बनाने और लाल सागर के व्यापारिक मार्ग को बाधित करने के लिए किया जा रहा था.
बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य क्यों है पूरी दुनिया के लिए अहम?
बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है. यह लाल सागर को अदन की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. उत्तर में स्वेज नहर के साथ मिलकर यह यूरोप और एशिया के बीच सबसे छोटा समुद्री रास्ता बनाता है. दुनिया का एक बड़ा हिस्सा क्रूड ऑयल, एलपीजी/एलएनजी गैस और कंटेनर कार्गो इसी रास्ते से होकर गुजरता है.
यदि इस संकरे समुद्री रास्ते में कोई बाधा आती है या जहाजों को अपना मार्ग बदलना पड़ता है, तो उन्हें अफ्रीका के 'केप ऑफ गुड होप' से होकर जाना पड़ेगा. इससे जहाजों की यात्रा लगभग 10 से 15 दिन लंबी हो जाएगी और हजारों समुद्री मील का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ेगा. इस वजह से ईंधन, माल ढुलाई (फ्रेट) और बीमा का खर्च अत्यधिक बढ़ जाएगा, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और महंगाई पर सीधा असर पड़ेगा.
यमन संघर्ष का लंबा इतिहास
सऊदी अरब और हूति विद्रोहियों के बीच यह जंग नई नहीं है, बल्कि इसका इतिहास यमन के एक दशक लंबे गृहयुद्ध से जुड़ा है. साल 2014 में ईरान समर्थित हूति विद्रोहियों ने यमन की राजधानी साना पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त राष्ट्रपति अब्द-रब्बु मंसूर हादी की सरकार को देश छोड़कर भागना पड़ा था.
सऊदी अरब ने हूति विद्रोहियों के इस कदम को अपनी दक्षिणी सीमा के लिए बड़ा सुरक्षा खतरा माना और क्षेत्र में ईरान के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए 2015 में अरब देशों का गठबंधन बनाकर यमन में सैन्य हस्तक्षेप शुरू किया था. साल 2022 में संयुक्त राष्ट्र (UN) की मध्यस्थता से युद्धविराम तो हुआ, लेकिन कोई स्थायी शांति समझौता नहीं हो सका. वर्तमान में उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर हूति विद्रोहियों का नियंत्रण कायम है और अब यह संघर्ष लाल सागर के अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र तक फैल चुका है.