सरगुजा राजस्व विवाद: तहसीलदारों ने दी बेमियादी आंदोलन की चेतावनी
अंबिकापुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में नायब तहसीलदार के साथ हुई कथित मारपीट का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. इस घटना के विरोध में प्रदेश भर के राजस्व अधिकारियों में भारी आक्रोश है. कनिष्ठ राजस्व अधिकारी संघ के आह्वान पर शुक्रवार को राज्य के 500 से अधिक तहसीलदारों और राजस्व कर्मियों ने काम बंद कर हड़ताल रखी.
संघ ने मुख्यमंत्री, राज्यपाल और सरगुजा आईजी के नाम ज्ञापन सौंपकर आरोपी विधायक और उनके समर्थकों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है. अधिकारियों का कहना है कि यदि जल्द ही कार्रवाई नहीं हुई, तो वे अनिश्चितकालीन आंदोलन पर जाने के लिए मजबूर होंगे.
इधर, मामले में नामजद भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो ने ऐलान किया था कि वे सुशासन की परंपरा का सम्मान करते हुए खुद सरगुजा आईजी के सामने सरेंडर करेंगे. इसी सिलसिले में वे शुक्रवार को अपने काफिले के साथ अंबिकापुर के लिए निकले भी थे, लेकिन बतौली और मंगारी के पास उनके समर्थकों ने उनका रास्ता रोक लिया, जिसके बाद वे वापस सीतापुर लौट गए.
विधायक ने देर रात तक रेस्ट हाउस में समर्थकों से चर्चा करने के बाद दोहराया कि वे गिरफ्तारी जरूर देंगे, हालांकि उन्होंने इसके लिए कोई निश्चित समय या तारीख नहीं बताई.
विधायक के इस कदम पर विपक्ष ने तीखा हमला बोला है. पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने इस पूरे घटनाक्रम को महज एक 'नौटंकी' करार दिया. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के राज में कानून व्यवस्था का तमाशा बन गया है. जब विधायक के खिलाफ मामला दर्ज है और थाना पास में ही है, तो आईजी दफ्तर जाकर सरेंडर करने का नाटक क्यों किया जा रहा है?
उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आरोपी सरेआम रैलियां निकाल रहा है और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है.
वहीं, दूसरी तरफ पीड़ित नायब तहसीलदार तुषार मानिक ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है. उन्होंने बताया कि जेल में बंद हत्या के एक आरोपी की पैरोल के लिए गलत तरीके से 25 लाख रुपये का शोध क्षमता (सॉल्वेंसी) प्रमाणपत्र बनाने का दबाव बनाया जा रहा था.
कनिष्ठ राजस्व अधिकारी संघ के प्रांताध्यक्ष कृष्ण कुमार लहरे के अनुसार, नियमानुसार तहसीलदार केवल 5 लाख रुपये तक का ही प्रमाणपत्र जारी कर सकता है, जिसके लिए कम से कम 6 एकड़ जमीन का होना जरूरी है. लेकिन आवेदिका ने महज 3 एकड़ जमीन के अधूरे दस्तावेजों के साथ आवेदन किया था.
अधिकारियों का आरोप है कि विधायक की बहन इस आधे-अधूरे कागजात पर जबरन हस्ताक्षर करने का दबाव बना रही थीं और मना करने पर अधिकारी के साथ अभद्रता व मारपीट की गई, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.