सबरीमाला स्वर्ण चोरी: दो FIR दर्ज, उन्नीकृष्णन पोट्टी मुख्य आरोपी नामित
नई दिल्ली । डेस्क: केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में सोने की चोरी को लेकर चल रहे विवाद में अब दो अलग-अलग एफआईआर (FIR) दर्ज की गई हैं. ये एफआईआर द्वारपालक मूर्तियों से सोना हटाने और दरवाजे के फ्रेम से सोना चोरी करने से संबंधित हैं.
चूंकि मामले में राज्य-स्तरीय जांच की आवश्यकता है, इसलिए एफआईआर अपराध शाखा (Crime Branch) मुख्यालय में दर्ज की गई हैं. यह दो अलग-अलग एफआईआर इसलिए दर्ज की गई हैं क्योंकि ये दोनों घटनाएं अलग-अलग समय पर हुई थीं.
दोनों मामलों में मुख्य आरोपी के तौर पर उन्नीकृष्णन पोट्टी का नाम लिया गया है और देवस्वोम के अधिकारी भी इन मामलों में आरोपी बनाए जा सकते हैं.
मार्च 2019 में द्वारपालक मूर्तियों पर लगी सोने की परतें हटाकर, गलाकर चुरा ली गई थीं. जबकि दरवाजे के फ्रेम से सोना चोरी करने की घटना अगस्त 2019 में हुई थी. समय के अंतर, इसमें शामिल अलग-अलग अधिकारियों और साजिश रचने वाले लोगों के कारण, जांच दो अलग-अलग मामलों के रूप में आगे बढ़ेगी. इन मामलों में मुख्य आरोप साजिश और विश्वासघात के हैं.
इस बीच, खबर है कि चोरी हुए सोने की मात्रा बढ़ सकती है. देवस्वोम सतर्कता (Devaswom Vigilance) की अंतिम रिपोर्ट में कहा गया था कि सबरीमाला से 989 ग्राम सोना गायब है. यह आंकड़ा केवल स्मार्ट क्रिएशन्स के सीईओ पंकज भंडारी के बयान पर आधारित था. हालांकि, 1998 में यूबी ग्रुप द्वारा दिया गया डेढ़ किलोग्राम सोना द्वारपालक मूर्तियों पर चढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया गया था.
स्मार्ट क्रिएशन्स का कहना है कि जब 2019 में मूर्तियों को चेन्नई में गलाया गया था, तब उनमें से केवल 577 ग्राम सोना ही मिला था. इससे सवाल उठता है कि शेष सोना कहाँ गया?
इसके अतिरिक्त, स्मार्ट क्रिएशन्स का दावा है कि जब किनारों पर लगी 7 परतों को गलाकर अलग किया गया, तो 409 ग्राम सोना मिला. 1998 में इन परतों पर कितना सोना चढ़ाया गया था, इसका कोई सटीक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है. जब इन दोनों मात्राओं को जोड़ा जाता है, तो गायब हुए सोने का वजन डेढ़ किलो से भी अधिक हो सकता है. अंतिम रिपोर्ट में गायब सोना आधे किलो से भी कम बताया गया है. विशेष जांच दल (SIT) के लिए गायब हुए सोने का पता लगाना एक बड़ी चुनौती है.