सोम, 19 अक्टू. 2026

CGKhabar

SC के आदेश के बाद भी 191 दागी उम्मीदवारों को टिकट देने का कारण छिपाया-ADR

C

CG Khabar

11 सित. 2026, 02:26 PM 3 मिनट में पढ़ें 2

ADR
ADR

नई दिल्ली । डेस्क: चुनावों में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों की बढ़ती संख्या को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बावजूद राजनीतिक दल पारदर्शिता बरतने में नाकाम साबित हो रहे हैं. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की हालिया रिपोर्ट में इस बात का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. इस साल की शुरुआत में हुए पांच राज्यों-तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, असम और पुडुचेरी-के विधानसभा चुनावों में 191 ऐसे दागी उम्मीदवार मैदान में उतारे गए, जिनके चयन की वजह राजनीतिक दलों ने सार्वजनिक ही नहीं की. वहीं, जिन मामलों में कारण बताए भी गए, वहां दलों ने अपनी जवाबदेही से बचने के लिए 'रटे-रटाए' और एक जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया.


सी-7 फॉर्मेट के नियमों का उल्लंघन


एडीआर के आंकड़ों के अनुसार, इन पांचों राज्यों में कुल 8,848 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था. प्रमुख 51 राजनीतिक दलों द्वारा टिकट दिए गए 3,539 उम्मीदवारों का विश्लेषण किया गया, जिनमें से 1,405 (लगभग 40 प्रतिशत) ने अपने चुनावी हलफनामों में आपराधिक मामले घोषित किए थे. सुप्रीम कोर्ट के 2020 के निर्देशों और निर्वाचन आयोग के नियमों के तहत राजनीतिक दलों को अपने दागी उम्मीदवारों के लिए 'फॉर्मेट सी-7' के तहत कारण सार्वजनिक करने होते हैं. इसमें केवल जीत की संभावना नहीं, बल्कि उम्मीदवार की योग्यता और साफ छवि वाले व्यक्ति को टिकट न दे पाने की ठोस वजह बतानी होती है. हालांकि, दल केवल 1,214 उम्मीदवारों के ही कारण सार्वजनिक कर सके और 191 (14 प्रतिशत) के मामले में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई.

विज्ञापन


तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा लापरवाही


बिना वजह बताए आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को मैदान में उतारने के मामले में तमिलनाडु शीर्ष पर रहा, जहां ऐसे 72 उम्मीदवारों की जानकारी गायब थी. तमिलनाडु में विश्लेषण किए गए 1,162 उम्मीदवारों में से 473 पर आपराधिक मामले थे. इसी प्रकार, पश्चिम बंगाल में 559 दागी उम्मीदवारों में से 55 की सी-7 रिपोर्ट उपलब्ध नहीं पाई गई. केरल में 268 दागी प्रत्याशियों में से 27, असम में 66 में से 10 और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में 39 में से 12 उम्मीदवारों के चयन का कारण जनता के सामने नहीं रखा गया.


एक ही ढर्रे पर सभी राजनीतिक दल


रिपोर्ट की सबसे चिंताजनक बात यह है कि राजनीतिक दलों ने कारण बताने की औपचारिकता पूरी करने के लिए एक ही तरह की भाषा का इस्तेमाल किया. उम्मीदवारों के व्यक्तिगत ट्रैक रिकॉर्ड या योग्यता के बजाय सामाजिक कार्य, लोकप्रियता और क्षेत्र में पकड़ जैसे सामान्य शब्दों को कॉपी-पेस्ट कर दिया गया. तमिलनाडु में भाजपा, द्रमुक, अन्नाद्रमुक और तमिझागा वेत्री कज़गम जैसी पार्टियों ने अलग-अलग उम्मीदवारों के लिए शब्द-दर-शब्द एक जैसा कारण दर्ज किया.


बिना आपराधिक केस वाले नेताओं की उपेक्षा पर भी रटे-रटाए तर्क


राजनीतिक दलों ने यह समझाने में भी कोई गंभीरता नहीं दिखाई कि उन्होंने किसी साफ-सुथरी छवि वाले व्यक्ति के स्थान पर आपराधिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवार को ही क्यों चुना. असम में ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) ने इस सवाल का जवाब देने के लिए अपने सभी प्रत्याशियों के लिए एक ही उत्तर चिपका दिया. भाजपा ने भी बहुसंख्यक उम्मीदवारों के लिए एक जैसी भाषा का प्रयोग किया, जबकि गण सुरक्षा पार्टी ने तो दोनों ही श्रेणियों में सभी प्रत्याशियों के लिए एक ही पैराग्राफ दोहरा दिया. एडीआर का कहना है कि यह विश्लेषण पार्टियों की वेबसाइटों और सोशल मीडिया हैंडल पर उपलब्ध डेटा के आधार पर तैयार किया गया है.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP