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RBI ने विदेश से वापस मंगाया 274 टन सोना, जाने क्यों ?

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28 अक्टू. 2025, 05:12 PM 5 मिनट में पढ़ें 1

सोना
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नई दिल्ली । डेस्क: वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और 'वित्तीय युद्ध' के बढ़ते खतरे के बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मार्च 2023 से अब तक विदेशों में रखा 274 टन सोना स्वदेश वापस मंगा लिया है. यह कदम रूस-यूक्रेन युद्ध और अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्ज़े जैसी घटनाओं के बाद तेज़ हुआ है, जिनमें G7 देशों द्वारा रूस और अफगानिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को जब्त कर लिया गया था, जिसने संप्रभु संपत्तियों को विदेशों में रखने पर संदेह पैदा कर दिया है.सोने की बड़ी वापसी RBI ने मार्च 2023 से सितंबर 2025 तक कुल 274 टन सोना वापस मंगाया है, जिसमें अकेले सितंबर के मध्य में समाप्त छमाही में 64 टन सोना देश में वापस लाया गया.


घरेलू भंडार में वृद्धि: सितंबर के अंत तक RBI के पास कुल 880.8 टन सोने के भंडार में से, अब 575.8 टन सोना देश के भीतर रखा गया है. शेष 290.3 टन सोना अभी भी बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) की निगरानी में है, जबकि 14 टन सोने का भंडार गोल्ड डिपॉजिट के रूप में है.


विशेषज्ञों की राय: पाइनट्री मैक्रो के संस्थापक रितेश जैन ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा है, "हमारा विचार है कि भारत के केंद्रीय बैंक को सोने की वापसी को तेज करना चाहिए क्योंकि हम एक भू-राजनीतिक रूप से खंडित दुनिया में रह रहे हैं, जहाँ कानून का शासन टूट गया है और G-7 द्वारा रूस के विदेशी मुद्रा भंडार को जब्त कर लिया गया है."


सुरक्षा का महत्व: जैन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि "इस 'बहादुर नई दुनिया' में, यदि सोना आपकी निगरानी में नहीं है, तो वह आपका सोना नहीं है." RBI का यह कदम संपत्ति की सुरक्षा और जोखिम विविधीकरण की रणनीति को दर्शाता है.


रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी: सोने की बढ़ती कीमतों के कारण RBI के कुल भंडार में इस पीली धातु की हिस्सेदारी बढ़कर 13.9% हो गई है.

विदेशी मुद्रा संपत्ति का प्रबंधन


सितंबर 2025 के अंत में, RBI की कुल विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ 579.18 बिलियन अमेरिकी डॉलर थीं. इसमें से 489.54 बिलियन डॉलर प्रतिभूतियों में, 46.11 बिलियन डॉलर अन्य केंद्रीय बैंकों और BIS के पास, और शेष 43.53 बिलियन डॉलर विदेशी वाणिज्यिक बैंकों के पास जमा थे.


RBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि भंडार प्रबंधन में नई रणनीतियों और उत्पादों की खोज करते हुए पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए, भंडार का एक छोटा हिस्सा बाहरी परिसंपत्ति प्रबंधकों द्वारा प्रबंधित किया जा रहा है, जो RBI अधिनियम, 1934 के अनुसार अनुमेय गतिविधियों के अनुरूप है.


RBI के भंडार प्रबंधन और भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव


1. सुरक्षा और संप्रभुता सुनिश्चित करना (Ensuring Security and Sovereignty)

सोने को विदेश से वापस लाना RBI की जोखिम प्रबंधन रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.


संपत्ति फ्रीज से बचाव: रूस और अफगानिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को जब्त किए जाने के बाद, केंद्रीय बैंकों में यह चिंता बढ़ी है कि भू-राजनीतिक संघर्षों के दौरान उनकी संप्रभु संपत्ति को 'वित्तीय युद्ध' के एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है.


घरेलू नियंत्रण: सोने को देश में वापस लाने से RBI को अपनी संपत्ति पर सीधा और पूर्ण नियंत्रण मिलता है. इसका मतलब है कि अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों या वित्तीय तनाव की स्थिति में भी भारत अपने महत्वपूर्ण सोने के भंडार तक पहुँच सुनिश्चित कर सकता है.


2. वित्तीय स्थिरता और विश्वास (Financial Stability and Trust)

सोने का बढ़ता भंडार और उसका घरेलू भंडारण अर्थव्यवस्था में विश्वास को मजबूत करता है.


संकट के समय सहारा: सोना एक सुरक्षित निवेश (Safe Haven Asset) माना जाता है. वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता या संकट के दौरान, सोने का बड़ा भंडार देश की भुगतान क्षमता (Repayment Capacity) और ऋण विश्वसनीयता (Creditworthiness) को मजबूत करता है. यह 1991 के भुगतान संतुलन संकट की पुनरावृत्ति को रोकने में मदद करता है, जब भारत को सोना गिरवी रखना पड़ा था.


मुद्रास्फीति से बचाव: सोना मुद्रास्फीति (Inflation) के विरुद्ध एक मजबूत बचाव का काम करता है, क्योंकि इसकी कीमत समय के साथ बढ़ती है और कागजी मुद्रा के मूल्यह्रास को संतुलित करती है.


3. भंडार का विविधीकरण (Diversification of Reserves)

सोने की हिस्सेदारी बढ़ने से विदेशी मुद्रा भंडार की संरचना में सुधार आता है.


डॉलर पर निर्भरता कम: RBI अपने कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का हिस्सा बढ़ाकर (वर्तमान में लगभग 13.9%) अमेरिकी डॉलर और अन्य मुद्राओं पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है. यह पोर्टफोलियो को विविधीकृत करता है और किसी एक मुद्रा में अस्थिरता के जोखिम को कम करता है.


लागत दक्षता: विदेशी बैंकों (जैसे बैंक ऑफ इंग्लैंड) में सोना रखने पर भंडारण शुल्क लगता है. इसे देश में वापस लाने से RBI इन आवर्ती लागतों को बचा सकता है.


4. बाह्य क्षेत्र प्रबंधन (External Sector Management)

विदेशी मुद्रा संपत्ति (Foreign Currency Assets - FCA) का प्रबंधन भारत के बाह्य क्षेत्र के स्वास्थ्य को दर्शाता है.


FCA का निवेश: RBI अपनी FCA (लगभग 579.18 बिलियन USD) को सावधानीपूर्वक विभिन्न सुरक्षित और तरल संपत्तियों में निवेश करता है, जिनमें अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिभूतियाँ (Securities) शामिल हैं. यह निवेश भारत के आयात कवर (Import Cover) को सुनिश्चित करता है, यानी भारत कितने महीनों तक आयात के लिए भुगतान कर सकता है.


बाहरी एसेट मैनेजर: भंडार के एक छोटे हिस्से को बाहरी प्रबंधकों (External Asset Managers) को सौंपना वैश्विक बाजार की विशेषज्ञता का उपयोग करने और नए निवेश उत्पादों को आज़माने की RBI की रणनीति का हिस्सा है, ताकि भंडार पर अधिक रिटर्न कमाया जा सके.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP